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Ghaziabad News: जेवरात कारोबारी की हत्या में दोषी को आजीवन कारावास

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गाजियाबाद। 26 साल पहले इंदिरापुरम क्षेत्र में जेवरात कारोबारी जितेंद्र उर्फ जीतू की हत्या में दोषी उसके दोस्त महेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हीरालाल ने दोषी पर 31 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। केस के एक आरोपी सचिन के हाजिर नहीं होने पर अदालत ने उसे फरार घोषित कर नोटिस जारी किया है। जबकि तीसरे आरोपी राजीव की मुकदमे की विवेचना के दौरान मौत हो चुकी थी। दोषी को सजा दिलाने में जितेंद्र से लूटे गए सामान की बरामदगी अहम रही। लूट का विरोध करने पर जितेंद्र की हत्या उसके दोस्त महेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर की थी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ममता गौतम ने बताया आठ जुलाई 1998 को इंदिरापुरम में न्यायखंड वाली डिवाइडर के पास एक युवक का शव पड़ा था। पुलिस की जांच में पता चला था कि मृतक युवक का नाम जितेंद्र उर्फ जीतू था। वह सोने चांदी और हीरों का कारोबारी था। जितेंद्र मूलरूप से मुंबई का रहने वाला था। उसकी पहचान अभियुक्त महेश से मुंबई में ही हुई थी। महेश के मामा मृतक जितेंद्र के पड़ोस में ही रहते थे। वहां जितेंद्र और महेश की आपस में दोस्ती हो गई। व्यापार के सिलसिले में जितेंद्र गाजियाबाद आए थे जितेंद्र के साथ लूटपाट करने के लिए अपने साथी राजीव तंवर व मुरादनगर निवासी सचिन के साथ मिलकर चाकुओं से हमला कर दिया। इसमें जितेंद्र की मौत हो गई। गाड़ी व जेवरात सहित अन्य सामान लूटकर भाग गए। मृतक जितेंद्र के पिता ने जब महेश के मामा को फोन किया कर महेश के बारे में जानकारी ली। मामा के फोन करने पर महेश ने बताया कि वह मुंबई में है। इसी झूठ के कारण महेश, उसके साथी सचिन व राजीव को आनंद विहार की तरफ जाते हुए पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने महेश और राजीव के पास से मृतक जितेंद्र का नीले रंग का ब्रीफकेस बरामद किया। उसमें मृतक जितेंद्र का चश्मा, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, उसकी पत्नी की फोटो, ज्वेलरी, अंगूठियां ब्रेसलेट चेन बरामद हुई। सचिन ने जितेंद्र से लूटी हुई घड़ी पहनी हुई थी। जांच के आधार पर हत्या के मामले में अभियुक्त महेश सचिन व राजीव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तीनों को जेल भेज दिया था। मामले में नौ गवाह पेश किए गए। आरोप पत्र 23 सितंबर 1998 में पेश किया गया था।
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