गाजियाबाद। शहर के मलिन बस्तियों (स्लम इलाकों) और गंदगी से जूझ रहे क्षेत्रों में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले तीन वर्ष में 322 से अधिक मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 203 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। सबसे अधिक मरीज विजयनगर, खोड़ा, लोनी, डासना, अर्थला, साहनी और नंदग्राम क्षेत्रों से सामने आए हैं। बीमारी के बारे में जागरूक करने के लिए जनवरी के अंतिम रविवार को अंतरराष्ट्रीय कुष्ठ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार महात्मागांधी की पुण्यतिथि पर 30 जनवरी को मनाया जाएगा।
102 मरीजों का चल रहा है इलाज
नोडल अधिकारी राकेश तेवतिया ने बताया कि बीते तीन वर्षों में कुष्ठ रोग के मामलों में उतार-चढ़ाव रहा है। वर्ष 2023 में जिले में 88 मामले सामने आए, जिनमें 86 नए मरीज थे और 73 मरीज ठीक हुए। वर्ष 2024 में 132 मामले दर्ज हुए, जिनमें 124 नए मरीज थे और 58 मरीज ठीक हुए। वर्ष 2025 में अब तक 102 मरीज मिले हैं, जिनमें 56 नए मरीज हैं और 77 मरीज ठीक हो चुके हैं। नोडल का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग ने आशा और एएनएम के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान चलाया है। इस अभियान में लोगों को रोग के लक्षणों के बारे में जानकारी दी जाती है और शरीर पर लाल दाग, सुन्नपन या खुजली जैसे लक्षणों की जांच की जाती है। संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनकी समय पर जांच और इलाज कराया जा रहा है।
जिले में यह क्षेत्र हैं संवेदनशील
खोड़ा कॉलोनी, विजयनगर, अर्थला, नंदग्राम, सिहानी, लोनी और डासना क्षेत्रों को कुष्ठ रोग के हॉटस्पॉट के रूप में पहचान की गई है। यहां घनी आबादी और सीमित संसाधनों के कारण बीमारी पर नियंत्रण चुनौतीपूर्ण है। मरीजों को समय-समय पर मॉनिटर किया जाता है और बीमारी पाए जाने पर उन्हें रबर की चप्पल, पट्टी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुष्ठ रोग छिपाने से समस्या बढ़ती है। लोग तुरंत इलाज करवाएं और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें। समय पर पहचान और उपचार से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।
कुपोषण और जागरूकता की कमी में तेजी से फैलता है कुष्ठ रोग
एमएमजी अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दीक्षित के अनुसार स्लम क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी, भीड़भाड़, कुपोषण और जागरूकता की कमी के कारण कुष्ठ रोग तेजी से फैलता है। शुरुआती लक्षणों को अनदेखा करने से रोग गंभीर हो सकता है। रोग के शुरुआती संकेतों में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे, सुन्नपन और हाथ-पैरों में कमजोरी शामिल हैं। इसके साथ ही अन्य संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया से फैलता है और यह मुख्य रूप से त्वचा, नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से लंबी अवधि के संपर्क में आने से होता है। यह रोग पुरानी प्रकृति का होता है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
तीन वर्ष में कुष्ठ रोग के आंकड़े:
वित्तीय वर्ष नए मरीज कुल मरीज
2025-26 56 102
2024-25 124 132
2023-24 86 88
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