गाजियाबाद। विधान परिषद के मेरठ-सहारनपुर खंड के स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ। जिले में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 26.76 और शिक्षक के लिए 56.03 फीसदी वोट पड़े। वर्ष 2020 के चुनाव की तुलना में स्नातक में मतदान 8.54 फीसदी कम रहा, जबकि शिक्षक में 13.28 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2020 में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 35.30 फीसदी और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 42.75 फीसदी मतदान हुआ था।
सुबह आठ से शाम चार बजे तक हुए मतदान के दौरान कुछ केंद्रों पर विवाद हुआ तो कहीं बिजली आपूर्ति बाधित होने से परेशानी आई। अर्थला स्थित कैलाशवती इंटर कॉलेज में बने केंद्र पर सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर झंडे और पोस्टर लगाकर मौजूद रहने का आरोप लगाया। इससे मौके पर हंगामा हो गया। प्रशासन की टीम ने हालात को संभाला। कई केंद्रों पर मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के कारण लोगों को बिना मतदान किए लौटना पड़ा।
जिले में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 31,169 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 9,845 मतदाता पंजीकृत थे। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की शुरुआत पहले घंटे से ही धीमी रही। मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुबह से ही अधिकारियों की तैनाती की गई थी। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने भी कई मतदान केंद्रों पर पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया।
मतदान शुरू होते ही विवाद, निर्वाचन आयोग से शिकायत
मतदान शुरू होने के साथ ही अर्थला स्थित कैलाशवती इंटर कॉलेज में बने केंद्र पर विवाद हो गया। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर झंडे और पोस्टर लगाकर मौजूद रहने का आरोप लगाया। मामले में सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निजी बसों से मतदाताओं को लेकर आ रही है। इस संबंध में एक वीडियो भी प्रसारित किया गया। इसके अलावा भी कुछ मतदान केंद्रों पर राजनीतिक दलों के पोस्टर लगे होने की शिकायतें मिलीं। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने बताया कि सुबह करीब साढ़े आठ बजे सूचना मिलने के बाद टीम को कैलाशवती इंटर कॉलेज भेजा गया और व्यवस्था दुरुस्त कराई गई। मतदान संपन्न होने तक जोनल मजिस्ट्रेट को केंद्र पर ही तैनात रखा गया। कुछ अन्य स्थानों पर पोस्टर लगे होने की शिकायत मिलने पर उन्हें हटवा दिया गया।
सूची से नाम गायब, वोट डाले बिना लौटे
मतदान के लिए केंद्रों पर पहुंचे कई लोगों को मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। राजनगर एक्सटेंशन स्थित राजनगर रेजिडेंसी निवासी एमके अग्रवाल ने बताया कि वह मतदान करने पहुंचे थे, लेकिन सूची में उनका नाम नहीं था। उनकी पत्नी का नाम भी गलत दर्ज था। इस कारण वह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान नहीं कर सके। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर पहुंची एक शिक्षिका ने भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि उनसे फॉर्म भरवाया गया था, लेकिन मतदाता सूची में नाम नहीं मिला। आरोप लगाया गया कि एक प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से ही 10 से 12 हजार फॉर्म लिए गए थे, लेकिन संबंधित लोगों के वोट नहीं बने। हालांकि, इन फॉर्म और मतदाता सूची से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। कई अन्य केंद्रों पर भी मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के कारण लोग बिना वोट डाले लौट गए। इसके अलावा कुछ मतदाताओं के परिवार के सदस्यों के मतदान केंद्र अलग-अलग थे। इससे भी लोगों को परेशानी हुई।
एमएलसी चुनाव- भाजपाइयों ने केंद्र के अंदर पर्ची देने का आरोप लगाया
मोदीनगर। भाजपाइयों ने गोविंदपुरी के सारा मार्ग स्थित महर्षि दयानंद इंटर कॉलेज में मतदान केंद्र के अंदर सपा पदाधिकारियों पर मतदाता पर्ची देने का आरोप लगाया। शुक्रवार दोपहर भाजपा विधायक डॉ. मंजू शिवाच, नगर अध्यक्ष आकाश शर्मा और सभासद ललित त्यागी नेताओं के साथ कॉलेज पहुंचे। भाजपा नेताओं ने कहा कि सपा कार्यकर्ता केंद्र के अंदर मतदाताओं को पर्ची दे रहे हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। इसे लेकर दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई, जबकि सपा नेताओं ने आरोपों को निराधार बताया।
उप जिलाधिकारी कोमल पंवार ने बताया कि प्रत्याशियों के बस्ते नियमानुसार केंद्र के बाहर लगे थे। कुछ मतदाता बिना पर्ची लिए केंद्र में पहुंच गए थे, जिससे गलतफहमी हुई थी।
छुट्टी की घोषणा के बावजूद खुले कई स्कूल
शिक्षा विभाग ने एमएलसी चुनाव को देखते हुए शुक्रवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया था, इसके बावजूद नगर में कई स्कूल खुले रहे। हापुड़ मार्ग स्थित दयावती पब्लिक स्कूल समेत कई स्कूलों के खुले होने के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। मामला संज्ञान में आने पर उप जिलाधिकारी ने प्रबंधन को फटकार लगाकर छुट्टी कराई।
लंबे संघर्ष के बाद बनी वोट, बोलीं- बैलेट पेपर से ही हो चुनाव
नगर की सूरत सिटी निवासी शिक्षिका पविता सिंह शुक्रवार को दिल्ली-मेरठ मार्ग स्थित डॉ. केएन मोदी केंद्र पर मतदान करने पहुंचीं। पचास वर्षीय पविता ने कहा कि वोट बनवाने के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा। बीते पांच चुनावों से हर बार आवेदन कर रही थीं, लेकिन बिना कारण बताए रद्द कर दिया जाता था। पहली बार वोटर बनने पर अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि ईवीएम से मतदान आसान है, लेकिन चुनाव बैलेट पेपर से ही होना चाहिए, इसकी विश्वसनीयता बेजोड़ है।
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