गाजियाबाद। जिला जज की कोर्ट में 29 अक्तूबर को किए गए लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल पर चल रहे वकीलों के तेवर बुधवार को और तल्ख हो गए। जिला जज अनिल कुमार बर्खास्तगी की मांग पर अड़े वकीलों ने न केवल हड़ताल जारी रखने के एलान किया है बल्कि शुक्रवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की बार की बैठक भी बुला ली है।
हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति से जुड़े सभी जिलों के वकीलों की बैठक में आंदोलन को धार देने की रणनीति तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि बैठक का मकसद गाजियाबाद की तरह अन्य जिलों में भी वकीलों की हड़ताल कराने का है। इसकी वजह यह है कि वकीलों की मांग पर अभी तक किसी भी स्तर से कोई आश्वासन तक नहीं मिला है।
वकीलों की मुख्य रूप से दो मांगे हैं, जिला जज अनिल कुमार को बर्खास्त किया जाए और लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में बुधवार को बार एसोसिएशन की बैठक में चर्चा की गई।
न्यायिक कार्य के बहिष्कार के साथ धरना-प्रदर्शन कर रहे वकीलों की बैठक में बार अध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा कि पांच नवंबर को हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति ने अपने स्तर से न्यायिक कार्य करने का निर्णय ले लिया। इसके लिए समिति में शामिल जिलों और तहसील की बार से वार्ता नहीं की गई। इस निर्णय की निंदा करते हुए दीपक शर्मा ने कहा, सभी बार के अध्यक्ष और सचिव के साथ बैठक करके रणनीति बनेगी।
खाने-पीने के सामान दुकानें भी बंद
वकीलों की हड़ताल का कचहरी में व्यापक असर दिखाई दे रहा है। बुधवार को खाने-पीने के सामान की दुकानें भी बंद रहीं। इतना ही नहीं। पानी की बोतलें तक नहीं बिकीं। टाइपिस्टों ने टाइप का काम नहीं किया। फोटो स्टेट की दुकानों को भी बंद रखा गया। इससे वादकारियों की परेशानी और बढ़ गई। वकीलों ने कोर्ट जाने के रास्ते बंद कर दिए हैं। जो लोग जैसे-तैसे अंदर पहुंचे, उन्हें पानी तक नहीं मिला।
30 हजार मुकदमों में लगी तारीख
वकीलों की हड़ताल से न तो कोर्ट में कोई गवाह पेश हो पा रहा है और न ही पुलिस की ओर से साक्ष्य रखे जा रहे हैं। रोज लगभग 10 हजार केस की सुनवाई होती है। तीन दिन में 30 हजार केस तारीख पर आ चुके। इन सभी में सिर्फ आगे की तारीख लगी है। ऐसे में सभी मामलों में फैसला होने में और देर लगेगी। इन केस से जुड़े लोगों में से कचहरी भी बहुत कम पहुंच रहे हैं। अधिकांश लोग काॅल करके वकील से तारीख पूछ रहे हैं।
165 जमानत अर्जी पर नहीं हुई सुनवाई
अदालतों में कामकाज होने पर रोजाना लगभग 60 केस में जमानत अर्जी पर सुनवाई होती है। हड़ताल की वजह से यह नहीं हो पा रही है। नई अर्जी तो डाली ही नहीं जा रही। 29 अक्तूबर से पहले डाली गई लगभग 165 जमानत अर्जी का भी निस्तारण नहीं हो सका है। ऐसे में जेल में कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। नए मामलों में कैदी जेल तो जा रहे हैं लेकिन जमानत न होने से कोई बाहर नहीं जा रहा। हड़ताल जितनी लंबी चलेगी, यह समस्या उतनी गंभीर होती जाएगी।
चर्चित मामले भी लटके
हड़ताल की वजह से चर्चित मामलों की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है। सीबीआई और ईडी कोर्ट में बाइक बोट घोटाला, मेडिकल कालेज की मान्यता दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने, यादव सिंह की आय से अधिक संपत्ति का मामला, ग्रेटर नोएडा में भूमि घोटाले में रिश्वत लेने के आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर विरेंद्र सिंह राठौर का केस, फ्लैट खरीदने और बेचने के बैंक लोन घोटाले में तारीख लग गई।
आंदोलन की कमजोर करने का प्रयास
(ऑडियो वायरल)
बुधवार को वकीलों के व्हाट्एप ग्रुप में ऑडियो वायरल हुआ। इसमें अधिवक्ता, पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाइकोर्ट बेंच संघर्ष समिति के पदाधिकारी और गाजियाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव विश्वास त्यागी के बीच बातचीत है। वकील कह रहे हैं कि एक मैसेज प्रसारित हो रहा है, जिसमें आंदोलन बेचने की बात कही जा रही है। विश्वास त्यागी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग आंदोलन को कमजोर करने के प्रयास में हैं। वह पूरे प्रकरण की जानकारी बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में देंगे।