गाजियाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ (बेंच) स्थापित करने और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को कचहरी में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने अदालतों में न्यायिक कार्य में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, न्यायालयों में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा। जिन अदालतों में अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए, वहां संबंधित मामलों में अगली तारीख निर्धारित कर दी गई।
बार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष ब्रह्मादेव त्यागी ने बताया कि हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के तत्वावधान में कानपुर में 10 व 11 सितंबर को आयोजित अधिवक्ता महासम्मेलन में 16 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था।
इसी निर्णय के तहत गाजियाबाद में भी अधिवक्ता अदालतों की कार्यवाही से अलग रहे। इस दौरान कई अधिवक्ता अपने चैंबर में बैठे रहे और बेंच की मांग समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा करते रहे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने के साथ अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
न्याय यात्रा की तैयारी पर भी चर्चा
मंगलवार को मेरठ बार एसोसिएशन में हुई वर्चुअल बैठक में कानपुर महासम्मेलन में लिए गए निर्णयों पर सहमति बनी थी। बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर विचार किया गया। इस दौरान न्याय यात्रा आयोजित करने को लेकर भी चर्चा हुई और इसकी योजना तैयार करने पर सहमति बनी।
दूर नहीं जाना पड़ेगा
अधिवक्ताओं का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित होने से इस क्षेत्र के लोगों को न्याय के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी। वहीं, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होने से अधिवक्ताओं को अपने कार्य के दौरान सुरक्षा और संरक्षण मिलने की व्यवस्था मजबूत होगी। अधिवक्ताओं ने दोनों मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही।