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Ghaziabad News: हड़ताल स्थगित करने पर वकील दो फाड़

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गाजियाबाद। चार नवंबर से चली आ रही हड़ताल को 21 दिन के लिए स्थगित किए जाने के फैसले पर मंगलवार को वकील दो फाड़ हो गए। वकीलों के एक गुट ने गाजियाबाद बार एसोसिएशन के हड़ताल स्थगन के फैसले को मानने से साफ इन्कार कर दिया। इस गुट के वकीलों ने एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव का पुतला फूंककर विरोध जताया और न्यायिक कार्य का बहिष्कार जारी रखने का एलान कर दिया।
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फैसले से नाराज वकीलों ने कहा, जिला जज अनिल कुमार को हटाए जाने और लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होने तक हड़ताल जारी रहेगी। कोई भी अधिवक्ता किसी भी कोर्ट में पेश नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन ने वकीलों से वार्ता किए बगैर एकतरफा निर्णय लिया है।
बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव नितिन यादव, पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक, पूर्व सचिव विजय गौड़, वरुण त्यागी, विनीत भारद्वाज और सुमित त्यागी ने बैठक कर कहा कि, 29 नवंबर को पश्चिम यूपी के जिलों के वकीलों का प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज जाकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिलेगा।
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उनके सामने जिला जज को हटाए जाने की मांग रखी जाएगी। फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में वकील कचहरी में दोपहर 12 बजे एकत्र हुए। उन्होंने एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा और सचिव अमित नेहरा का पुतला फूंका। इसके बाद पूरी कचहरी में घूमकर न्यायिक कार्य का बहिष्कार कराया। अधिवक्ता राकेश त्यागी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी हो जाने के बाद ही अनशन खत्म होगा।


आमने-सामने

यह हमारे आत्मसम्मान की लड़ाई है
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव विजय गौड़ का कहना है कि अध्यक्ष और सचिव ने बगैर कार्यकारिणी की सलाह लिए हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया है। युवा अधिवक्ता इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया है। इस मुद्दे पर कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर प्रस्ताव लाया जाएगा।
अधिवक्ता गौरव त्यागी ने कहा, इस हड़ताल में दूसरे जिले के वकील भी शामिल हैं। 22 दिनों तक हड़ताल पर रहने के बाद भी वकील खाली हाथ हैं। जब तक जिला जज का ट्रांसफर नहीं होगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी और 29 को अधिवक्ता प्रयागराज मुख्य न्यायाधीश से मिलने जाएंगे।
अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा, हड़ताल खत्म करने का युवा अधिवक्ता विरोध कर रहे हैं। हड़ताल जारी रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं का भी सहयोग है। जिला जज के रहते कोर्ट में वकीलों पर लाठीचार्ज होना काफी निंदनीय है, ये हमारे आत्मसम्मान की लड़ाई है जो जारी रहेगी।

अधिवक्ता विनय सिंह ने कहा, किसी भी नतीजे से पहुंचने से पहले ही हड़ताल खत्म कर दी गई। हमारी मांग है कि जिला जज का ट्रांसफर हो और लाठी चार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो, हमारी बस ये दो ही मांगें है। आगे की रणनीति गठित कार्यकारिणी तय करेगी।
फैसले का विरोध करना गलत

गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा का कहना है कि हड़ताल स्थगित करने के फैसले का विरोध गलत है। विरोध प्रदर्शन करने वाले ये वे ही लोग हैं जिन्होंने हड़ताल के दौरान अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही थी। इनमें से कुछ लोग वकील भी नहीं हैं। वकील बुधवार को भी काम करेंगे, 21 दिनों में मांग पूरी न होने पर प्रदेश स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे। जिला जज कोर्ट का बहिष्कार जारी रहेगा और काम सुचारू रूप से होता रहेगा।
सचिव अमित नेहरा का कहना है कि मंगलवार की दोपहर कचहरी में हुआ प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित था, बार एसोसिएशन का फैसले से हड़ताल खत्म हो चुकी है और आज भी काम हुआ और कल भी अधिवक्ता काम करेंगे। कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें वकीलों के हितों से कोई सरोकार नहीं है, ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाएगा।



तीसरी बार हुआ वकीलों में विवाद
1. 29 अक्तूबर को पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज किया था। उसी दिन से वकीलों ने हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया। चार नवंबर को कोर्ट खुलीं। तब से वकील हड़ताल पर हैं।
2. इस दौरान सबसे पहले पश्चिम यूपी हाईकोर्ट बेंच स्थापना संघर्ष समिति ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। इसका समिति से जुड़ी बार एसोसिएशन ने विरोध किया। हड़ताल जारी रही।
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3. 16 नवंबर को दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब के वकीलों के महापंचायत में आठ दिन के लिए हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया गया। इसे वकीलों ने नहीं माना।

4. तीसरी बार विवाद अब सामने आया। इस दफा बार एसोसिएशन ने हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया है। इसका वकील विरोध कर रहे हैं।
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