इंदिरापुरम। गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के टावर डी में 9वीं से लेकर 13वीं मंजिल तक के दृश्य को देखकर यह यकीन करना मुश्किल है कि कुछ ही घंटों में जिंदगी इतनी बदल सकती है। आग ने लोगों की गाढ़ी कमाई से तैयार सपनों के घर को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि उनकी दुनिया को एक झटके में पलट दिया।
बुधवार सुबह तक जहां लोगों की चहलकदमी, बच्चों की हंसी और रोजमर्रा की भागदौड़ रहती थी, हादसे के दूसरे दिन वहां राख के ढेर और खामोशी का डेरा था। वातावरण में घुली आग की भेंट चढ़ी गृहस्थी की गंध हादसे की भयावहता बयां कर रही थी। आग की धधक से काली पड़ चुकीं दीवारें उन मनहूस पलों की दास्तान कह रही थीं।
बृहस्पतिवार को जब लोग अपने फ्लैटों की ओर लौटे तो अधिकतर के पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। हर किसी की आंखें घर के कोनों में कुछ तलाश रही थीं, शायद कोई बची हुई किताब, कोई फोटो या कोई अन्य चीज। हालांकि, ज्यादातर हाथ सिर्फ राख छूकर खाली लौट आए।
प्रभावित परिवारों के चेहरों पर मायूसी झलक रही थी, लेकिन अधिकतर लोग बातचीत से बचते नजर आए। एक निवासी ने कहा कि अब सब जलकर राख हो गया है। कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं।
सोसायटी में अपनी बहन का फ्लैट देखने पहुंचे प्रशांत ने बताया कि उनकी बहन ने महज आठ महीने पहले ही घर खरीदा था और उसे सजाया था, जो कुछ ही मिनटों में तबाह हो गया।