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प्यासा नहीं रहेगा लाइनपार, बनेगा सीडब्ल्यूआर

Sun, 24 Apr 2016 12:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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पानी - फोटो : अमर उजाला
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लाइनपार क्षेत्र की कालोनियों के लाखों रेजिडेंट्स अब पानी की किल्लत से नहीं जूझेंगे। ‘अमर उजाला’ की पानी को लेकर चल रही मुहिम रंग लाई। वार्ड-2 के पार्षद कुलदीप ने शनिवार को निगम सदन में ‘अमर उजाला’ की प्रति लहराकर अफसरों को पानी संकट से जूझ रहे लाइनपार की पीड़ा बताई।
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विजयनगर जोन में सीडब्ल्यूआर बनवाने की मांग उठाई तो अन्य पार्षद उनके समर्थन में उतर आए। निगम सदन और नगर आयुक्त ने अफसरों से तत्काल रिपोर्ट ली और जरूरत को देखते हुए लाइनपार क्षेत्र में सीडब्ल्यूआर बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए।

‘अमर उजाला’ ने शहर में पानी की समस्या को लेकर ‘बिन पानी कैसी जिंदगानी’ शीर्षक से मुहिम शुरू की थी। इसके जरिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की किल्लत के हालातों को निगम अफसरों तक पहुंचाया।
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शुक्रवार के अंक में ही ‘लाइनपार मांग रहा एक सीडब्ल्यूआर’ शीर्षक से विजयनगर वार्ड-2 के हालात को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। शनिवार को स्थानीय पार्षद कुलदीप ने निगम बैठक में अफसरों से इस पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब है कि विजयनगर क्षेत्र अखबारों की सुर्खियां बनने लगा है।

इस पर विजयनगर क्षेत्र के अन्य पार्षद सुल्तान सिंह खारी, अजीत सिंह भाटी, सिंह राज ने उनका समर्थन किया। महापौर अशु वर्मा ने नगर आयुक्त को सीडब्ल्यूआर बनवाने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त अब्दुल समद ने भी उनकी पीड़ा को समझा और तत्काल जलकल अभियंता आरके यादव को बुलाकर रिपोर्ट मांगी।

जलकल अभियंता ने बताया कि वास्तव में वहां सीडब्ल्यूआर की जरूरत है। इसके बन जाने से कई वार्ड में पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण पर करीब 2 करोड़ की लागत आएगी।

निगम सदन ने अवस्थापना फंड से सीडब्ल्यूआर के लिए 2 करोड़ रुपये रिजर्व कर दिए। नगर आयुक्त ने बताया कि जल निगम से एस्टिमेट तैयार कराकर जल्द ही इसका निर्माण शुरू कराया जाएगा।

क्या होगा फायदा
सीडब्ल्यूआर करीब 40 लाख लीटर की क्षमता वाला भूमिगत जलाशय होता है। इसमें क्षेत्र की कई ट्यूबवेलों का पानी इकट्ठा किया जाता है और यहां से बड़े पंप के जरिए इस पानी को ओवरहेड टैंक में चढ़ाया जाता है।

इससे आसपास के लोगों को प्रेशर से पानी मिलता है। लाइट चले जाने पर भी टैंक से पानी की सप्लाई की जा सकती है। इसके बिना डायरेक्ट ट्यूबवेल से पानी टैंक में चढ़ाया जाना संभव नहीं होता।
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