मोदीनगर। गांव बखरवा से आठ दिन पहले लापता हुए लैब अटेंडेंट पवन शर्मा का शव मंगलवार को खेत में पड़ा मिला। शव क्षत-विक्षत अवस्था में था। उसे जानवरों ने खा रखा था। घटनास्थल से जहरीले पदार्थ की एक खाली डिब्बी भी बरामद हुई है। परिजनों ने अगवा कर हत्या करने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस प्रथमदृष्टया इसे आत्महत्या मान रही है। ऐसे में मामला हत्या और खुदकुशी के बीच उलझ गया है।
42 वर्षीय पवन शर्मा नगर के डॉ. केएन मोदी फाउंडेशन के इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में रसायन विभाग में लैब अटेंडेंट थे। वह पत्नी अमृता, 21 वर्षीय पुत्री अंशिका, 19 वर्षीय पुत्र तुषार शर्मा और 14 वर्षीय पुत्र निकुंज के साथ गांव बखरवा में रहते थे।
पुत्र तुषार ने बताया कि बीती 21 सितंबर की सुबह करीब 8:30 बजे उन्होंने पिता को इंस्टीट्यूट जाने के लिए दिल्ली-मेरठ मार्ग पर रैपिड ट्रेन के नॉर्थ स्टेशन के पास छोड़ा था। इसके बाद पवन घर नहीं लौटे। परिजनों ने कॉल की तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। परिजनों ने पवन को काफी तलाश किया। मोदीनगर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों में पोस्टर भी लगाए, मगर उनका पता नहीं लगा। इसके बाद तुषार ने मोदीनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
गांव से लगभग दो किमी दूर मिला शव
बखरवा गांव के कुछ किसान मंगलवार सुबह जंगल की तरफ गए थे, इसी दौरान उन्होंने गांव से लगभग दो किमी दूर ईख के खेत में एक व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव पड़ा देखा। किसानों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मृतक के परिजनों से संपर्क किया तो उन्होंने पवन शर्मा के रूप में पहचान की। ग्रामीणों ने बताया कि शव को जानवरों ने बुरी तरह खा रखा था। केवल पेट के कुछ हिस्से में ही मांस बचा था। पवन की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
एसीपी बोले, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण
एसीपी मोदीनगर सिद्धार्थ गौतम और एसएचओ मोदीनगर ने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। एसीपी ने बताया कि मौके से जहरीले पदार्थ की एक डिब्बी, पानी की बोतल और गिलास बरामद हुआ है। डिब्बी में दो गोलियां शेष थीं और कुछ पाउडर भी इधर-उधर बिखरा हुआ था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि पवन शर्मा ने करीब एक साल पूर्व लगभग 90 लाख रुपये की जमीन बेची थी। इसके बाद उन्होंने मकान बनवाया था। पवन पर लगभग 40 लाख रुपये कर्ज होने की बात भी सामने आई। उन्होंने गोल्ड लोन भी लिया था। एसीपी का कहना है कि प्रथमदृष्टया मामला खुदकुशी का लग रहा है। हालांकि, मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप
तुषार शर्मा ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि पिता के लापता होने के बाद वह 21 सितंबर को थाने गए थे, मगर पुलिस ने 24 घंटे की तलाश के बाद गुमशुदगी दर्ज करने की बात कहते हुए उन्हें थाने से टरका दिया। इसके बाद पुलिस ने 22 सितंबर को कार्रवाई की। आरोप है कि पुलिस ने खोजबीन में भी हीलाहवाली की। आरोप है कि पुलिस ने देरी से सीडीआर निकलवाई। सीडीआर से पता चला कि लापता होने के तीन दिन बाद 24 सितंबर को उनका मोबाइल फोन तीन घंटे तक ऑन रहा था और उसकी लोकेशन गांव के पांच किमी के दायरे में थी। तुषार का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो शायद आज उनके पिता जिंदा होते।
परिजनों के सवाल
-अगर पवन का मोबाइल 24 सितंबर को ऑन हुआ तो वह तीन दिन तक कहां थे?
-अगर मौके पर जहरीले पदार्थ की डिब्बी और गोलियां बरामद हुईं तो उसका किसी जानवर पर भी प्रभाव हुआ होगा, मगर घटनास्थल के आसपास कोई मृत जानवर नहीं दिखा।
-घटनास्थल संपर्क मार्ग से करीब पांच सौ मीटर दूर था। पवन ने खुदकुशी की तो संपर्क मार्ग से बहुत ज्यादा अंदर जाना संदेह पैदा कर रहा है।