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मोहन नगर की गुलमोहर ग्रीन में जुगाड़ पर चल रहा एसटीपी

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मोहन नगर की गुलमोहर ग्रीन में जुगाड़ पर चल रहा एसटीपी - मोटर पंप लगाकर नगर निगम के सीवर लाइन में गंदगी डालने का आरोप - मानसून में पंप न चलने से फ्लैटों में भर जाता है गंदगी का पानी - आरडब्लूए का दावा सोसायटी की गंदगी को नगर निगम की सुपर सकर मशीन से कराया जाता है साफ - जीडीए में भी शिकायत के बाद नहीं हो रहा समाधान माई सिटी रिपोर्टर  साहिबाबाद। मानसून सीजन शुरू होने से पहले मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन सोसायटी के लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। बारिश के दौरान पंप बंद होने से बेसमेंट के अलावा फ्लैटों में पानी बैक मारने लगता है। आरोप है कि सोसायटी में लगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जुगाड़ पर चल रहा है। उसमें मोटर पंप लगाकर दूसरी सीवर लाइन में गंदगी बहा दी जाती है। वहीं, सोसायटी के टावरों में भी अलार्म मशीन न होने से सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जबकि जिन लिफ्टों में इमरजेंसी मशीन लगी है उनमें वह खराब पड़ी हैं। ऐसे में लोगों को सुरक्षा की भी चिंता लगी रहती है।   आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेश सिंघल ने बताया कि वर्ष 2002 के बाद बिल्डर द्वारा लोगों को पजेशन देने के बाद सोसायटी में काफी चीजें अधूरी थीं। उन्हें पूरा करने के लिए कई बार मीटिंग हुई। जिनमें बिल्डर ने काम पूरा करने का आश्वासन दिया था। लेकिन हैरत की बात है कि अभी तक उनमें कई काम जस के तस पड़े हैं। जबकि मेंटेनेंस ना होने से सोसायटी की दशा भी बिगड़ी हुई है। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2018 में उन्होंने सोसायटी के गारबेज का निस्तारण कराने के लिए बिल्डर, जीडीए और हिंडन एयरफोर्स के अधिकारियों को भी पत्र लिखा था। हालांकि इस पत्र में गारबजे के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्वाइंट भी शामिल थे। मगर आरोप है कि अब सोसायटी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट रामभरोसे है। उसमें सिर्फ जुगाड़ पर गारबेज का निस्तारण किया जाता है। लोगों का कहना है कि एसटीपी पिछले सात वर्षों से ठीक से काम नहीं कर रहा है। चूंकि नीचे की लाइनों में कई जगह पर गड़बड़ी है। इसीलिए सीवेज के पानी को निकालने के लिए पंप लगाया जाता है। इस बीच पूरी सोसायटी में बदबू और गंदगी फैल जाती है। जिससे सोसायटी के साढ़े चार हजार लोगों को बदबू झेलनी पड़ती है। वहीं, पंप लगाने के दौरान लोगों को बच्चों के साथ हादसा होने का भी डर लगा रहता है। क्यूंकि पंप लगाने के लिए मेनहोल का ढक्कन खुला छोड़ दिया जाता है। इस जुगाड़ वाले एसटीपी के बारे में जीडीए से भी शिकायत की गई। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, पंप भी कभी-कभी चलने से मानसून में बेसमेंट के बाद फ्लैटों में गंदगी बैक मारने लगती है। इसके अलावा लिफ्टों की मेंटेनेंस और फिर इमरजेंसी अलार्म को लेकर कई बार मांग उठी। लेकिन कुछ लिफ्टों में अलार्म लगाकर काम अधर में छोड़ दिया गया।  परिचर्चा ः सोसायटी के 27 टावरों में लिफ्टें तो लगा दीं। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से उनमें कोई उपकरण नहीं लगा है। अगर बिजली जाने पर अचानक लिफ्ट अटक जाएं या कोई खराबी होने पर फंस जाए तो उसमें अलार्म भी नहीं लगा है। इससे लिफ्ट का उपयोग करते हुए डर लगता है। जोगिंद्र चौधरी, स्थानीय निवासी -सोसायटी का एसटीपी सिर्फ जुगाड़ पर चलता है। मानसून के दौरान को हालात काफी बेकार हो जाती है।  जगह-जगह गंदगी होने पर रेजिडेंट्स ही वहां सफाई करते हैं। लिफ्टों में अलार्म नहीं लगे हैं। सोसायटी के लोग काफी परेशान हैं। दीपांका उर्फ बब्ली - मेंटेनेंस तो बढ़ा दिया लेकिन उस हिसाब से सुविधा नहीं मिल रही हैं। एसटीपी ज्यादातर समय बंद रहता है, सफाई है नहीं, पंप चलाने के दौरान काफी बदबू आती है। सुरक्षा व्यवस्था को नाम भरोसे है। बारिश के सीजन में तो गंदगी फ्लैटों में भरने लगती है। इसका विरोध भी किया लेकिन कोई असर नहीं होता है। जीडीए अधिकारी भी मौन हैं। डॉ. अनुराग दीप, स्थानीय निवासी  -----------------------------------  इस मामले में सोसायटी के सीईओ सुनील जिंदल को फोन कर पक्ष जानने का प्रयास किया गया। लेकिन उनका फोन नहीं मिलने से बात नहीं हो सकी।  ---------------------- सुमित कुमार
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