राज्य सभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के साथ जुनैद। स्रोत वीडियोग्रैब
गाजियाबाद/मसूरी। जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में 35 दिन रहकर आंदोलनकारियों को खाद्य सामग्री का वितरण करने वाले मसूरी के नाहल गांव निवासी जुनैद का वीडियो सोमवार को वायरल हुआ। उसमें उसने खुद को सुरक्षित बताते हुए लोगों से परेशान न होने की अपील की। उसने यह भी दावा किया कि उसको किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।
बार-बार उनके पास फोन और मैसेज आ रहे थे, जिसमें लोग उनके व परिवार के बारे में पूछ रहे थे। जुनैद ने धरने में शामिल रहने के पीछे की मंशा की वजह के बारे में बताया कि उससे सीजेपी के किसी नेता ने कोई संपर्क नहीं किया। जब कोई जानवर भी किसी के पास रहता है तो उससे लगाव हो जाता है, इसलिए उन्होंने मानवता का फर्ज निभाया।
एलएलबी के छात्र जुनैद का खाद्य सामग्री बांटने का वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सराहना की थी। जुनैद ने आरोप लगाया कि मसूरी पुलिस उनके घर धमक गई। 23 जुलाई को उनके पिता को दो बार थाने ले जाया गया। वहां उनसे पूछताछ हुई। उनके मोबाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खातों की जांच की गई। इतना ही नहीं, अगले दिन 24 जुलाई को उनकी बहन की मेरठ स्थित ससुराल में भी पुलिस ने पूछताछ की। परिवार और रिश्तेदारों के बैंक खातों को भी खंगाला गया।
जुनैद का कहना है कि उन्हें केवल इसलिए परेशान किया गया, क्योंकि उनका नाम जुनैद है। जबकि उन्होंने खाद्य सामग्री का वितरण कर इंसानियत का फर्ज निभाया था। पुलिस को जांच करनी है तो वह अपना काम करे, उनको इसमें कोई दिक्क्त भी नहीं है। हालांकि सोमवार को जुनैद के सुर पूरी तरह बदल गए। उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मीडियाकर्मी उनको तलाशते रहे, लेकिन उन्होंने किसी से कोई बात नहीं की। इस बारे में एसीपी मसूरी सुनील कुमार ने बताया कि जुनैद के पिता मुस्तफा से पूछताछ की गई थी। उसके बाद उनको घर भेज दिया गया। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
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