दिल्ली निकाय चुनाव में जीत हासिल होने के साथ ही गाजियाबाद के भाजपाइयों में ‘खुशी और गम’ का माहौल देखने को मिला। कुछ भाजपाई जहां इस जीत के सेहरे में खुद को भी शामिल करने से नहीं चूकें, वहीं जरा-जरा सी बात पर अपनी बात रखने वाले कुछ भाजपाई बुधवार को नदारद नजर आए।
दरअसल पूरा मामला दिल्ली फार्मूले को लेकर था। दिल्ली की जीत के बाद भाजपाई अब अपने निकाय चुनाव के गुणा-भाग में जुट गए हैं।इस बार दिल्ली में पार्टी संगठन ने सभी नए चेहरों को पार्षद का टिकट दिया था।
पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने स्पष्ट भी किया था कि अगर दिल्ली में यह फार्मूला कामयाब होता है तो इसे अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। यही कारण है कि बुधवार दोपहर तक जैसे ही दिल्ली निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा ने बाजी मारी, वैसे ही कुछ भाइपाइयों के चेहरे मुरझा गए।
इनमें से कुछ ऐसे थे जोकि इस बार भी निकाय चुनाव में अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं। अब उन्हें डर सताने लगा है कि दिल्ली फार्मूले को अगर यूपी में लागू किया गया तो इस बार उनका पत्ता कट जाएगा। ठीक इसके विपरीत कुछ ऐसे भी चेहरे थे जोकि इस जीत पर खुश नजर आए।
उनका कहना था कि दिल्ली फार्मूला अगर यूपी में भी लागू हो गया तो कम से कम सीट से चिपके नेताओं से छुटकारा और नए चेहरों को आगे आने का मौका मिलेगा।