गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण संपत्ति की नामांतरण प्रक्रिया को आसान करने की योजना बना रहा है। इसके लिए नियमों को और सरल किया जाएगा। इसके लिए जीडीए वीसी ने कमेटी गठित कर दी है। नामांतरण के दौरान स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए विचार किया जा रहा है। ऐसा होने पर लोगों को काफी सहूलियत होगी। दीपावली के बाद संपत्ति अपने नाम कराना आसान होगा।
अब तक स्थलीय रिपोर्ट लगने के बाद ही नामांतरण की व्यवस्था है। यदि किसी की मृत्यु हो गई है और उसकी संपत्ति की नामांतरण उसके आश्रित के नाम होना है तो नामांतरण का अप्लीकेशन देने के बाद जीडीए का कर्मचारी मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करता है, वह देखता है कि जो मानचित्र पास है उसी के हिसाब से निर्माण हुआ है कि नहीं। यदि स्वीकृत मानचित्र से अलग कुछ निर्माण किया गया है तो अतिरिक्त निर्माण का शमन शुल्क जमा करने के बाद ही नामांतरण प्रक्रिया होती है। यदि कोई किसी से जीडीए की संपत्ति खरीदता है तो नामांतरण के समय इसमें भी यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। खरीदार संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के बाद बाद शमन शुल्क से बचता है और विक्रेता से शमन शुल्क लेने की मांग करता है। ऐसे में कई बार विवाद की स्थित उत्पन्न हो जाती है। इन विवादों को समाप्त करने के लिए नामांतरण की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए कवायद की जा रही है।
- करीब एक हजार आवेदन लंबित-
जीडीए के आठों जोन में करीब एक हजार आवेदन लंबित हैं। अकेले इंदिरापुरम में करीब 150 आवेदन हैं। इसके अलावा अन्य जोन में भी 80 से 100 आवेदन लंबित हैं। प्रक्रिया के आसान होने से इन आवेदनों के निस्तारण में तेजी आएगी।
यदि कोई संपत्ति किसी से खरीदता है तो खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह स्वीकृत मानचित्र की जीडीए से जांच करके ही खरीदे। संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद यदि अतिरिक्त निर्माण पाया जाता है तो शमन शुल्क खरीदार से लिया जाएगा। दीपावली के बाद संपत्ति अपने नाम कराना आसान होगा। - अतुल वत्स, जीडीए वीसी।