कई वरिष्ठ आईपीएस, आईएएस से संपर्क... पहले भी कई काम कराए
अनिल कटियाल के पिता चेतराम कटियाल आईआरएस अधिकारी रहे हैं। उसकी शुरुआती पढ़ाई सेंट कोलंबस व सेंटर स्टीफंस में हुई है। 1979 में उसने यूपीएससी की परीक्षा दी थी, जिसमें वह असफल रहा। तभी वह पीएचडी करने के लिए यूएसए की येल यूनिवर्सिटी चला गया। वहां से वह अगले साल लौट आया और हिंदुस्तान लीवर में प्रबंधक के पद पर नौकरी की। 2000 से 2005 तक उसने यामाहा कंपनी में भी चीफ जनरल मैनेजर के पद पर काम किया।
2005 से 2015 तक उसने वोडाफोन में वाइस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट अफेयर्स के पद पर भी काम किया और फिर रिटायरमेंट ले लिया। जिन लोगों ने अनिल कटियाल के साथ यूपीएससी की परीक्षा दी थी, उनमें से कई सफल हुए और अधिकारी बन गए। उनके वह संपर्क में रहा। पिता के अधिकारी होने का भी उसको फायदा मिला। इसी आधार पर वह अधिकारियों के नजदीक पहुंच जाता था और काम करा लेता था।
करा लिए कई बड़े काम
पुलिस की जांच में पता चला कि नामी कंपनी के लिए उसने अधिकारी पर दबाव बनाकर बार का लाइसेंस जारी करा लिया। उसने आरटीओ व आबकारी विभाग में कई बड़े काम खुद आईपीएस अधिकारी बताकर करा लिए। विदेश मंत्री को अपना सहपाठी बताकर उसने वहां भी काम कराने का प्रयास किया।
विदेश में भी रिश्ते
जांच में सामने आया है कि विनोद कपूर कन्सट्रंक्शन का बड़ा कारोबारी है। कई एयरपोर्ट का भी उसने निर्माण किया। विनोद से अनिल की मुलाकात गुरविंदर के माध्यम से हुई थी। गुरविंदर दुबई में ट्रेडिंग का काम करता है। उसी जरिये वह दुबई के अरबपति रियल स्टेट कारोबारी राज साहनी के संपर्क में आ गए। राज साहनी व उसका बेटा 100 मिलियन यूएआई मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में फंसे हुए हैं। उनको भारत लाने में अनिल कटियाल प्रयासरत था। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से भी संपर्क साध रहा था। राज साहनी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की पूर्व पत्नी का रिश्तेदार है।
आत्मविश्वास देख अधिकारियों को हुआ विश्वास
हाय...निमिष कैसे हैं? मैं 1969 बैच का मणिपुर कैडर का आईपीएस अधिकारी अनिल कटियाल हूं। वर्तमान में गृह मंत्रालय में सलाहकार हूं। इंदिरापुरम पुलिस बड़ा परेशान कर रही है। हमारे मित्र विनोद कपूर को धोखाधड़ी के मामले में गलत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया। वरिष्ठ अधिकारी समझकर डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने भी अनिल कटियाल व उनके साथ आए विनोद कपूर को सम्मान से बैठाया और पूरी बात इत्मिनान से सुनी।
इसलिए गहराया शक
पुलिस आयुक्त अजय मिश्र ने भी अनिल कटियाल को वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते पहले सम्मान दिया। जब वह जाने लगा तो उसने आयुक्त के साथ फोटो खिंचवाने के लिए कहा। इसके बाद उनको शक हो गया। पुलिस आयुक्त कार्यालय से जब अनिल कटियाल को फोन किया गया और बैच आदि के बारे में पूछा गया तो कभी खुद को दस साल पहले रिटायर्ड बताया तो कभी 20 साल बाद नौकरी छोड़ने की बात कहने लगा। तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
दो अधिकारी हो चुके हैं सस्पेंड
विनोद कपूर को पुलिस ने गुरूग्राम से हिरासत में लिया था। वह हवालात में भी बंद रहा। विनोद कपूर ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की। कहा कि उनको हिरासत में लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच कराई गई तो पता चला कि निरीक्षक कुलदीप कुमार, एसएसआई प्रमोद हुड्डा ने संबंधित थाने की पुलिस से कोई संपर्क नहीं साधा। न ही उनको इसकी सूचना दी। इसी लापरवाही के लिए दोनों को निलंबित किया गया।