विभाग को धोखा देकर उठा रहे योजना का लाभ
सालाना 1.50 करोड़ रुपये टर्नओवर तक के व्यापारी समाधान योजना के दायरे में आते हैं। समाधान योजना के अंतर्गत ऐसे व्यापारियों को पंजीकरण करना होता है। इसमें सर्विस प्रोवाइडर के लिए जीएसटी की देयता पांच प्रतिशत तय है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए दो प्रतिशत और ट्रेडर्स के लिए एक प्रतिशत कर देता निर्धारित है, लेकिन राज्य कर विभाग को धोखा देकर ऐसे व्यापारी भी योजना का लाभ उठा रहे हैं, जिनका टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। कम बिक्री दिखाकर खुद को योजना में शामिल किए हुए हैं।
विभाग के रडार पर कई रेस्तरां
राज्य कर विभाग के गाजियाबाद जोन के अंतर्गत आने वाले जनपद गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विभागीय सूचनाओं के आधार पर ऐसे व्यापारियों को चिह्नित किया जा रहा है जो जीएसटी की कंपाउंड स्कीम की आड़ में अपना टर्नओवर छुपाकर कम टैक्स की अदायगी कर रहे हैं। इनमें कई रेस्तारां भी विभाग के रडार पर हैं। जीएसटी समाधान योजना के अंतर्गत पंजीकृत रेस्तरां आदि पर विभाग की पैनी नजर है। ऐसे व्यापारियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है।
समाधान योजना का लाभ लेने वाले सभी व्यापारियों से बार-बार अनुरोध किया जाता है कि वह अपने वास्तविक टर्नओवर के आधार पर टैक्स जमा करें। जो व्यापारी ऐसा नहीं कर रहे हैं उनपर कार्रवाई की जा रही है। -दिनेश कुमार मिश्र, अपर आयुक्त ग्रेड-1 राज्य कर विभाग