कालाधन पर केंद्र की सख्त कार्रवाई का असर दिखने लगा है। इसके चलते गाजियाबाद आईटी यूनिट मालामाल हो गई है। इनकम टैक्स डिक्लरेशन स्कीम (आईडीएस) और नोटबंदी के बाद गाजियाबाद यूनिट ने 2900 करोड़ रुपये का टैक्स एकत्र किया है जो बीते वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य से 900 करोड़ अधिक अधिक है।
इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कवायद से कितने बड़े पैमाने पर टैक्स कलेक्शन बढ़ा है।हालांकि नोटबंदी के चलते बीते वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में कारपोरेट टैक्स घट गया। नोटबंदी का असर कंपनियों से जुड़े कारोबार पर पड़ा, जिससे बड़ी कंपनियों से आने वाला टैक्स भी गिरा।
इन सबके साथ बात अगर पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो कारपोरेट व नॉन कारपोरेट टैक्स में इजाफा हुआ है लेकिन इस अवधि के दौरान नॉन कारपोरेट टैक्स में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई।
15 मार्च तक जमा किए गए एडवांस टैक्स में भी चार गुना तक की वृद्धि हुई है जो वित्तीय वर्ष 2015-16 में करीब 51 करोड़ रुपये एडवांस टैक्स मिला था जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में पिछले साल के मुकाबले डेढ़ सौ करोड़ बढ़ गया यानी करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
नोटबंदी और स्कीम का मिला लाभ
इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी मानते हैं कि टैक्स कलेक्शन में बढ़ोत्तरी केंद्र की तमाम योजनाओं के चलते हुई है। कालेधन को घोषित करने के लिए लाई गई आईडीएस के चलते काफी लोगों ने काफी धनराशि जमा की। इसके बाद नोटबंदी के दौरान और उसके बाद अचानक से टैक्स कलेक्शन में बढ़ोत्तरी हुई है।
एक तरह से व्यक्तिगत टैक्स की श्रेणी में आने वाले नॉन कारपोरेट का ग्राफ अचानक से बीते वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमारी के दौरान इजाफा हुआ। खासकर दिसंबर महीने के बाद से लोगों ने अपने कारोबारी टर्नओवर को 10 गुना तक बढ़ाकर दिखाया और उसके बाद इनकम बढ़ाकर टैक्स जमा किया।