गाजियाबाद । इनकम टैक्स डिक्लरेशन स्कीम व नोटबंदी के बाद अब सरकार संदिग्ध एकाउंट होल्डर की व्यापक पैमाने पर सर्च करा रही है। रेवेन्यू से जुड़े तमाम विभाग टैक्स चोरी रोकने में लगे हैं। इसी कड़ी में कालेधन को सफेद करने वाले लोग आयकर की रडार पर हैं, जिनकी फाइलें आयकर विभाग में खंगाली जा रही हैं।
ऐसे में उन तमाम लोगों के लिए चिंता की स्थिति है जिन्होंने रिटर्न फाइल करते वक्त तमाम पेच लड़ाए हैं और कालेधन को सफेद दिखाने की कोशिश की है। आयकर की हर यूनिट में एक टीम सिर्फ रिटर्न फाइलों की छानबीन कर रही है।
अभी तक की जांच में तमाम ऐसे लोग चिन्हित किए हैं जिन्होंने बीते वित्तीय वर्ष में अपना कारोबार कई सौ गुना बढ़ा हुआ दिखाया है। जबकि बीते पांच -सात साल के दौरान कोई इनकम टैक्स नहीं दिया। सालाना 10 से 12 लाख का टर्नओवर था और सिर्फ ढाई से तीन लाख की इनकम रिटर्न में दिखाई।
आयकर के एक अधिकारी बताते हैं कि एक पार्टी ने बीते सालों में कोई टैक्स विभाग को नहीं दिया था लेकिन अचानक वित्तीय वर्ष 2016-17 में अपना कारोबार 90 लाख रुपये दिखाकर उससे प्राप्त हुई नेट इनकम पर नियमानुसार करीब तीन से साढ़े तीन लाख का आयकर जमा किया।
विभाग की टीम ने संबंधित पार्टी को बुलाया और बीते पांच साल का रिकार्ड मांगा। पूरा रिकार्ड देखा तो पता चला कि संबंधित पार्टी का सालाना कारोबार 1 करोड़ रुपए से कहीं अधिक का था, जिस पर प्रतिवर्ष पार्टी को करीब 21 लाख रुपये टैक्स देना था। ऐसे में पार्टी को नोटिस जारी किया गया और पांच साल का टैक्स जमा करने को कहा गया। उसके बाद पार्टी ने करीब 90 लाख रुपए से अधिक जमा कराए हैं।
सीए की मदद नहीं आएगी काम
कालेधन को सफेद करने के लिए व्यापक पैमाने पर लोगों ने सीए की मदद ली है और फिर उसी फार्मूले पर रिटर्न दाखिल किया है। एक आयकर अधिकारी बताते हैं कि बीते वित्तीय वर्ष में कारपोरेट और नॉन कारपोरेट श्रेणी में लोगों का कारोबार व व्यक्तिगत आमदनी उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ी है, जिस पर उन्होंने आयकर जमा किया।
ऐसी कंपनियों एवं फर्मों ने खरीद-बिक्री में बेशुमार बढ़ोत्तरी दिखाई है। जाहिर है कि यह कालेधन को नंबर एक करने का फार्मूला है जो पार्टियों ने सीए व अन्य लोगों की मदद से अपनाया है लेकिन इनकम टैक्स रूल में साफ है कि विभाग छह साल तक का रिकार्ड खंगाल सकता है।
इसलिए जिन्होंने बीते वित्तीय वर्ष में रिटर्न फाइल किया है, उनकी बीते और आगे के छह साल तक जांच हो सकी है, जो अब विभाग कर रहा है। ऐसे में वो तमाम लोग रडार पर हैं जिनका कारोबार बेशुमार बढ़ा है और उन्होंने बीते वित्तीय वर्ष से पहले कोई इनकम टैक्स नहीं दिया।
ढाई लाख से अधिक जमा करने वाले रडार पर
सरकार और आयकर पहले से स्पष्ट करती आ रही है कि नोटबंदी के दौरान ढाई लाख से अधिक रुपये अपने किसी भी खाते में जमा करने वालों से पूछताछ होगी। गाजियाबाद समेत आयकर की सभी यूनिटों ने व्यापक पैमाने पर ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इसी बीच अब ऐसे तमाम लोगों की विस्तार से जांच की जा रही है।