गाजियाबाद। आईएएस अधिकारियों और उनके खास कर्मचारियों का नेक्सेस तोड़ने और भूमाफिया पर शिकंजा कसने के लिए आयकर विभाग ने बुधवार को पूरी ताकत झोंक दी लेकिन नतीजा संतोषजनक नहीं आया। प्रदेश भर में करीब 15 ठिकानों पर एक साथ छापा डालने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया गया।
करीब 60 गाड़ियां और 200 से अधिक अधिकारी व कर्मचारियों को लगाया गया ताकि कहीं कोई खामी न रह जाए। इन सब के बावजूद इनपुट के हिसाब से सफलता नहीं मिली। जितनी बड़ी टैक्स चोरी पकड़े जाने की उम्मीद थी उसके मुकाबले बेहद कम कैश व प्रॉपर्टी के कागजात हाथ लगे।
विभाग की गाजियाबाद स्थित इन्वेस्टिगेशन विंग ने कार्रवाई से पहले सभी की रेकी की थी और बैंकों के दस्तावेज भी खंगाले थे। सूत्र बताते हैं कि विभाग को इनपुट मिला था कि 150 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ी जा सकती है।
इसके बाद छापामारी का खाका करीब 20 दिन पहले तैयार किया गया। फाइल लखनऊ स्थित डायरेक्टर के सामने रखी गई और अनुमति मिलते ही छापामारी का रोडमैप बनाया गया। छापा 15 दिन पहले ही पड़ना था लेकिन विभाग में कुछ लोगों के ट्रांसफर होने व पुलिस बल उपलब्ध न होने की स्थिति में कार्रवाई आगे खिसक गई।
अब बुधवार को लखनऊ, मेरठ, नोएडा, मैनपुरी, बागपत और दिल्ली के करीब 15 ठिकानों पर छापे मारे गए और 12 घंटे की कार्रवाई के बाद रिजल्ट उम्मीद से बेहद कम रहा। इससे अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है। यादव सिंह पर हुई कार्रवाई के बाद प्रदेश आईटी का यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन था। हालांकि यह ऑपरेशन फ्लाप शो साबित होता दिख रहा है।
देर रात तक की कार्रवाई में ज्यादा कुछ नहीं लगा हाथ
विभागीय सूत्र बताते हैं कि लखनऊ में छापामारी के दौरान तीन प्रॉपर्टी के कागजात मिले हैं जो 55, 27 व 37 लाख रुपये के आसपास के हैं। वहीं, लखनऊ से ही करीब 12 लाख रुपये का कैश मिला है।
उधर, बागपत में भट्ठा कारोबारी एवं प्रॉपर्टी डीलर के पास से करीब 15 लाख का कैश मिला है। इसी तरह से मेरठ में भी करीब 5 से 8 लाख का कैश मिला है जबकि नोएडा व दिल्ली में की गई कार्रवाई में ज्यादा कुछ हाथ नहीं लग पाया है।
यादव सिंह पर छापामारी के लिए झोंकी थी इतनी ही ताकत
आयकर ने नवंबर 2014 में नोएडा से जुड़ी तीनों अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर छापामारी के लिए इतनी बड़ी ही ताकत झोंकी थी। यादव सिंह पर कार्रवाई करने के लिए करीब 15 से अधिक टीमें और 150 से अधिक अधिकारी व अन्य स्टाफ को लगाया गया था वो विभाग की सबसे सफल कार्रवाई भी रही थी, लेकिन बुधवार को बड़ी ताकत झोंकने के बाद भी विभाग ज्यादा कुछ नहीं जुटा पाया है।
दिल्ली से ली गईं अधिकांश गाड़ियां
छापा डालने से पहले विभाग ने पूरी गोपनीयता रखी। टैक्सी भी दिल्ली से हायर की गईं ताकि स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी भनक न लगे। मंगलवार दोपहर को टैक्सी बुक की गईं, जिन्हें बुधवार सुबह साढ़े चार बजे गाजियाबाद स्थित हापुड़ चुंगी कार्यालय बुला लिया गया।
इसके बाद छह बजे तक टीमों को लोकेशन बताकर रवाना किया गया लेकिन किसके यहां छापा डालने जाना है यह जानकारी किसी को नहीं दी गई। टीमें स्थान पर पहुंची तो उन्हें अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम व पते बताए गए।