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Ghaziabad News: 13 सालों में पिता ने देखा स्वास्थ्य व्यवस्था का सच

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गाजियाबाद। पिछले 13 सालों में हरीश राणा के पिता अशोक राणा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सबसे करीबी परिचय में आए। बेटे को पंजाब के अस्पतालों से लेकर दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में दिखाया। घर में होमकेयर के लिए नर्स रखीं। नामी-गिरामी डॉक्टरों से संपर्क साधा।
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इन सब अनुभवों के बीच उन्होंने देखा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में कई गंभीर कमियां हैं। अशोक राणा कहते हैं ''''मैं किसी की निंदा नहीं करना चाहता, लेकिन यह सच है कि मैंने देश में स्वास्थ्य सेवा का बुरा हाल देखा। कई नामी अस्पतालों के डॉक्टरों को पेट में ट्यूब से खाना देने की विधि तक नहीं पता थी। कई होमकेयर नर्सों को भी यह जानकारी नहीं थी। सपोर्ट सिस्टम की भी कमी नजर आई। यह देखकर मैं हैरान रह गया कि सब कुछ किस तरह चल रहा है।''''

उनका कहना है कि इस लंबी और दर्दनाक लड़ाई ने न केवल उन्हें अपने बेटे की देखभाल की वास्तविकता दिखा दी, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमियों पर भी सवाल खड़ा कर दिया।
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परिवार को मिलेगी 10 लाख की आर्थिक सहायता
माई सिटी रिपोर्टर

गाजियाबाद। हरीश के परिवार को शासन की ओर से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री ने परिवार की मदद के लिए यह स्वीकृति प्रदान की है। जिलाधिकारी ने कहा कि सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन को हरीश की दवाओं पर हुए खर्च का भुगतान करने और भविष्य में किसी चिकित्सीय सहायता की जरूरत होने पर सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे पहले बुधवार को जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने हरीश राणा के परिवार से मुलाकात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। तत्काल राहत के तौर पर ढाई लाख रुपये का चेक भी परिवार को सौंपा गया था। इसके अलावा परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एक दुकान आवंटित करने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह सहायता परिवार के भरण-पोषण और जीवनयापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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