प्रदूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे गाजियाबाद, लोनी, हापुड़ और बुलंदशहर समेत प्रदेश के 19 शहरों के लोगों को जल्द ही इस समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके लिए तैयार की गई परियोजनाओं को प्रदेश सरकार के बाद अब केंद्र सरकार ने भी मंजूरी दे दी है। इनका क्रियान्वयन अटल मिशन फॉर रिज्यूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के तहत किया जाना है।
परियोजनाओं पर आने वाली कुल लागत (21736.44 लाख रुपये) केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगे। अमृत योजना से संबंधित इन परियोजनाओं की डीपीआर जल निगम ने करीब तीन महीने पहले ही तैयार कर ली थी। इन्हें मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली ‘राज्य स्तरीय उच्चाधिकार संचालन समिति’ ने मंजूरी दे दी थी।
इसके बाद परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा गठित ‘अपेक्स कमेटी’ को भेज दिया गया था। बीते सप्ताह उन्हें मंजूरी मिल गई है। जिन 19 शहरों केलिए पेयजल की 20 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें गाजियाबाद, वाराणसी, इलाहाबाद और मेरठ शामिल हैं।
15 अन्य परियोजनाएं बुलंदशहर, खुर्जा, लोनी, हापुड़ समेत नगर पालिका परिषद वाले शहरों के लिए स्वीकृत हुई हैं। केंद्र के निर्देश के मुताबिक नगर विकास विभाग सरकारी एजेंसियों के लिए गाइड लाइन तैयार करा रहा है। योजना के तहत उन घरों को पानी का कनेक्शन दिया जाएगा, जहां अभी तक आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
शहरों की पुरानी पाइप लाइन बदलने के साथ ही पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का विस्तार भी किया जाएगा।