आईएमए चिकित्सकों की हड़ताल का आंशिक असर रहा। कांवड़ यात्रा की वजह से मरीजों की संख्या पहले से ही कम थी। इसके साथ ही हड़ताल की पहले से जानकारी होने के चलते ज्यादातर मरीज अस्पतालों में नहीं आए।
क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट के विरोध में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक सभी अस्पताल और लैब बंद रहे। चिकित्सक अस्पताल बंद करके आईएमए भवन में एकत्र हुए और बैठक की। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
आईएमए चिकित्सकों की हड़ताल के दौरान नेहरूनगर, पटेलनगर, आरडीसी, कविनगर सहित शहर भर के अस्पताल, क्लीनिक और पैथलैब आदि बंद रहे। कुछ मरीज वापस लौटे तो कुछ ने दो बजने तक का इंतजार किया।
हड़ताल के दौरान गंभीर मरीजों का इमरजेंसी में इलाज हुआ। दोपहर 12 बजे आईएमए के लगभग 150 चिकित्सक कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। वहां चिकित्सकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट को जनविरोधी बताया।
उनका कहना था कि इस एक्ट के लागू होने के बाद मेडिकल सेवाएं काफी महंगी हो जाएंगी और आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सुभाष अग्रवाल ने बताया कि अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो आगे और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
आईएमए के इस विरोध का नीमा, नर्सिंग होम एसोसिएशन, आईडीए फार्मास्यिूटिकल एसोसिएशन के सदस्यों ने भी समर्थन किया। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से उपाध्यक्ष वीबी जिंदल, सचिव पल्लव रस्तोगी, डॉ. राजीव गोयल, डॉ. बीसी जोशी, डॉ. आरके पोद्दार, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. अरुण गुप्ता सहित अन्य महिला और पुरुष चिकित्सक शामिल रहे।