साहिबाबाद। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में रिहायसी संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश पर यदि पालन हुआ तो गाजियाबाद में भी सैकड़ों व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद कर दिए जाएंगे। यहां भी बड़ी संख्या में आवासीय इलाके में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर ब्रेक लग जाएगा। आवास विकास परिषद हो या फिर जीडीए की आवासीय योजनाएं, गाजियाबाद में बड़ी संख्या में आवासीय इलाके में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही है।
टीएचए के वसुंधरा, इंदिरापुरम, लाजपत नगर ऐसे इलाके हैं जहां धड़ल्ले से ग्राउंड फ्लोर के फ्लैटों में दुकानें चल रही हैं। मार्च 2026 में भी आवास विकास आयुक्त ने वसुंधरा योजना के आवासीय इलाके में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराने या फिर नए सिरे से कंपाउंडिंग फीस जमा कराने के दिशा निर्देश दिए थे। आवास आयुक्त के आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर वसुंधरा में ऐसे दुकानदारों को नोटिस भी जारी किया गया था। बाद में दुकानदारों ने अधीक्षण अभियंता के साथ बैठक भी की और नए सिरे से कंपाउंडिंग फीस जमा करने की प्रक्रिया को भी समझा था, बावजूद इसके अभी तक आगे की कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। यह स्थिति न केवल आवास विकास परिषद की योजनाओं में है बल्कि जीडीए की योजनाओं में भी है।
अब तक 45 संस्थान कर चुके हैं सील
लखनऊ में कोचिंग हादसे के बाद आवास विकास परिषद ने अपनी योजनाओं में कुल 45 ऐसे प्रतिष्ठानों को बंद कराया था जो रिहायसी इलाके में चल रहे थे। इनमें होटल से लेकर शिक्षण संस्थान व अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे।
टीओडी योजना में आने से वसुंधरा के लोगों को कंपाउंडिंग फीस जमा कर मिलेगी राहत
आवास विकास परिषद की वसुंधरा अब टीओडी योजना में शामिल है, ऐसे में यहां मिश्रित भू उपयोग किया जा सकता है, इसके लिए कंपाउंडिंग फीस जमा करनी होगी। अधिशासी अभियंता निखिल माहेश्वरी ने बताया कि वसुंधरा में करीब 400 से अधिक लोगों को कंपाउंडिंग फीस जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है, इनमें से कुछ लोगों ने फीस जमा भी की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर कंपाउंडिंग फीस जमा नहीं करने वालों को नोटिस जारी किया जाएगा। समय रहते कंपाउंडिंग फीस जमा किए जाने पर प्रतिष्ठान वैध हो जाएंगे।