गाजियाबाद। एनजीटी में नगर आयुक्त तलब हुए तो इसकी गाज निगम के एक बाबू पर गिरी। नगर आयुक्त ने एनजीटी में लगे केस को हैंडल करने वाले लिपिक महेंद्र प्रताप ‘मोंटी’ को निलंबित कर दिया है। बीओटी फर्मों को रिकवरी के रिमाइंडर जारी न किए जाने पर नगर आयुक्त ने विभाग के बाबू हिमांशु शर्मा को भी सस्पेंड कर दिया है।
एनजीटी ने शहर में जहां-तहां कूड़ा फेंके जाने को लेकर नगर आयुक्त, जीडीए वीसी और डीएम को तलब किया था। पांच अक्तूबर को तीनों एनजीटी में पेश हुए। निगम सूत्रों की मानें तो नगर आयुक्त इससे काफी नाराज थे।
उन्होंने एनजीटी मामलों के लिए जिम्मेदारी संभाल रहे महेंद्र प्रताप ‘मोंटी’ को निलंबित कर दिया है। महेंद्र प्रताप पर एनजीटी के मामलों में लापरवाही और बिना बताए अनुपस्थित रहने का भी आरोप है।
वहीं बीओटी विभाग में तैनात मुख्य लिपिक हिमांशु शर्मा को भी नगर आयुक्त ने निलंबित कर दिया है। उन पर बीओटी फर्मों को आरसी नोटिस का रिमाइंडर न भेजने आदि के आरोप है। हिमांशु शर्मा की जांच नगर आयुक्त ने जीएम जलकल संजय सिन्हा को और महेंद्र प्रताप की जांच उन्हीं के विभाग के अधिशासी अभियंता संजय चौहान को दी है।
कोर्ट केस में पेशी होने पर कई बाबू झेल चुके निलंबन
हाईकोर्ट और एनजीटी में नगर आयुक्त की जब-जब पेशी हुई तब-तब बाबुओं और अधिकारियों पर वेतन रोके जाने या निलंबन की गाज गिरी है। नगर आयुक्त विधि विभाग के लिपिक देवेंद्र कुमार, फारूख अली, विधि अधीक्षक विशाल गौरव को पूर्व में निलंबित कर चुके हैं। इसके अलावा निवर्तमान तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा का वेतन और फंड आदि रोके जा चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य बाबू मोहन कुमार को भी नगर आयुक्त निलंबित कर चुके हैं।