गाजियाबाद। इंदिरापुरम और क्रॉसिंग रिपब्लिक का हस्तांतरण अब तक नगर निगम को नहीं किया जा सका है, लेकिन इन दोनों ही जगह रहने वाले लोगों को संपत्ति कर का भुगतान करना पड़ रहा है। नगर निगम अधिनियम-1959 में स्पष्ट उल्लेख है कि निगम की सीमा के अंतर्गत आने वाली आवासीय या गैर आवासीय संपत्तियों को कर का भुगतान करना अनिवार्य होगा। ऐसी स्थिति में वेव सिटी को छूट कैसे दी जा सकती है। ऐसी ही दलीलों के साथ नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बुधवार को लखनऊ में समिति की पहली बैठक में नगर निगम गाजियाबाद का पक्ष रखा।
हाईटेक टाउनशिप वेव सिटी का हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि की वसूली नहीं किए जाने के प्रावधान को समाप्त / संशोधन करने के अनुरोध के मामले में शासन की ओर से समिति का गठन किया गया है। बुधवार को विशेष सचिव उदय भानु त्रिपाठी की अध्यक्षता समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। वेव सिटी के अलावा डासना नगर पालिका के अंतर्गत आने वाली सन सिटी और लखनऊ में विकसित की जा रही सुशांत गोल्फ सिटी के मामले में विचार-विमर्श किया गया। गाजियाबाद नगर निगम की तरफ से नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और मुख्य कर अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा इस बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, प्रमुख सचिव नगर विकास, निदेशक आवास बंधु, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी इस समिति में शामिल हैं।
क्या है मामला
दरअसल, साल 2007 में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने हाइटेक टाउनशिप नीति का निर्धारण करने का शासनादेश जारी किया था। विकासकर्ता कंपनियों को साल 2011 से सात वर्ष की अवधि के लिए
हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि से छूट का प्रावधान किया गया था। साल 2016 में अवधि दस साल तक कर दी गई। इसके बाद साल 2021 में एक बार फिर पांच वर्ष की अवधि बढ़ाने का प्रावधान कर दिया गया।
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महापौर के पत्राचार के बाद कवायद शुरू
28 नवंबर 2023 को महापौर सुनीता दयाल ने वेव सिटी का संपत्ति कर जमा न होने और कचरा निस्तारण न होने का मामला नगर विकास मंत्री के समक्ष उठाया था। पत्र के माध्यम से महापौर ने बताया था कि वेवसिटी में भवनों के निर्माण से करोड़ों रुपये की आय विकासकर्ता अर्जित कर रहा है। पांच हजार भवनों का कचरा वेव सिटी के बाहर डाला जा रहा है, जिसका निस्तारण नगर निगम को करना पड़ रहा है। नगर निकाय को हस्तांतरण होने तक कर नहीं लगाए जाने के प्रावधान को समाप्ता किए जाने के अनुरोध पर शासन स्तर से कवायद शुरू हुई है।