फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghaziabad News: परिवार साथ था इसलिए बच गए, अकेले होते तो शायद नहीं बचती जान

विज्ञापन
विज्ञापन
इंदिरापुरम। घर में न कुछ दिख रहा था, न सांस लेने को हवा थी। चारों तरफ धुआं और आग की तपिश से कांच टूटने की आवाज आसपास आ रही थी। इस दौरान सभी ने एक दूसरे का हाथ कसकर थाम लिया और ईश्वर से प्रार्थना की। आंखों के सामने मौत का मंजर था लेकिन एक दूसरे के प्रति प्यार और विश्वास ने ही सबके जीवन की डोर थामे रखी। यह बातें आग में घिरे बुर्जुग जय प्रकाश गुप्ता और उनकी पत्नी प्रभा गुप्ता ने कहीं। उन्होंने कहा कि यदि वह अकेले होते तो शायद जान नहीं बचती। बुजुर्ग दंपती ने कहा कि मौत के मंजर के बीच वें 40 मिनट जीवन के 75 वर्ष से भी लंबे लग रहे थे।
विज्ञापन

नीतिखंड दो के प्रगति लेन स्थित बैकुंठम बिल्डर अपार्टमेंट में लगी आग में प्रभा, उनके पति समेत परिवार के नौ सदस्य करीब 40 मिनट तक फंसे रहे। आग की लपटें और जहरीला धुआं हर पल जान लेने की ओर बढ़ रहा था। बेटी सीमा गोयल, दामाद शरद गोयल और बहू पूजा गुप्ता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बुजुर्गों और बच्चों को ढांढस बंधाया और सबको एक साथ रखा।


रेस्क्यू के बाद भी प्रभा के हाथ-पैर कांप रहे थे। आंखों में आंसू थे और आवाज में घबराहट। बुजुर्ग प्रभा गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को उनके बेटी-दामाद घर आए हुए थे। बड़ा बेटा विशाल अपने कार्यालय और छोटा बेटा विशाल जिम में थे। घर पर बेटी-दामाद, दो बहुएं और बच्चे थें। सभी लोग हंस-खेल रहे थे और अचानक घर के दरवाजे पर लगी घंटी बजी। कुछ देर पहले ही घर से काम करके नीचे गई घरेलू सहायिका हांफती हुई ऊपर पहुंची और बताया कि आग लग गई है। सहायिका की सूचना पर छोटी बहू नेहा ने बिना समय गंवाए कंबल लेकर नीचे आग बुझाने दौड़ी, उन्हें लगा कि कोई छोटी आग होगी। लिफ्ट से नीचे पहुंचते ही वह दोपहिया पार्किंग में फंस गई। ऊपर भी वापस न जा पाई। वह किसी तरह बिल्डिंग के बाहर निकल गई। इस दौरान काला धुआं घर में पूरी तरह घुस गया। उन्होंने तुरंत गैस के रेग्यूलेटर और एसी बंद कराए। इसके बाद दामाद ने पहले उन्हें बड़े बेटे के कमरे में बिठाया और डायल 112 पर कॉल करके सूचना दी। सूचना पर तुरंत आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष मनीष, पार्षद धीरज अग्रवाल व अन्य स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए।
विज्ञापन


हादसे की खबर देख रहे थे टीवी पर...जब सामने हुआ तब लगा डर
बुजुर्ग दंपती ने बताया कि वह हर रोज टीवी और समाचार पत्रों में दिल्ली, गाजियाबाद, इंदिरापुरम, लखनऊ में हुए आग हादसों को देख रहे थे। खबरों से हादसों का भयावह मंजर सुनते समय दिल सहम जाता था। दो दिन पहले दिल्ली के शाहदरा में हुए हादसे और गौर ग्रीन सोसायटी में हुए हादसे के बारे में भी सुना था। आज जब घर में हादसा हुआ तो लगा सारी दुनिया ही खत्म हो गई। हालांकि परिवार का साथ, दमकल व स्थानीय लोगों की हिम्मत और हौसले ने उन्हें व उनके परिवार को सुरक्षित रखा।

बेटी-दामाद और बहू बढ़ाती रही हौंसला
आग की तपिश और धुआं के बीच बजुर्ग दंपती और बच्चे जहां बुरी तरह घबरा गए तो उस दौरान बेटी, दामाद और बहू ने उन्हें संभाला। बिना समय गंवाए पहले तो सभी इलेक्टि्रक स्विच बंद कर दिए और घर के नल को खोल पानी का छिड़काव किया ताकि धुएं का असर कम रहे। उनकी पुत्रवधू नेहा और पूजा गुप्ता ने बताया कि हर बार कांच के चटकने पर मां-बाबूजी और बच्चों का चेहरा भय से थर्रा जाता था। 40 मिनट में घर के अलग-अलग कोने में जाते रहे और एक दूसरे को विश्वास दिलाते रहे कि ईश्वर सब ठीक रखेगा। इस पर सभी ने विश्वास रखा और सब सुरक्षित घर से बाहर निकले।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें