गाजियाबाद। 12वीं परीक्षा की तैयारी में लगी छात्रा को भौतिक-रसायन विज्ञान की किताब खोलते ही उल्टी और चक्कर आने लगते हैं। माता-पिता ने छात्रा की सभी जांच कराई तो रिपोर्ट नॉर्मल आई।
इसके बाद डॉक्टर ने सलाह दिया कि छात्रा को मनोवैज्ञानिक से काउंसिलिंग कराइए। काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि छात्रा का भौतिक-रसायन विज्ञान पढ़ने में कोई रुचि नहीं है। इस तरह के निजी मनोवैज्ञानिकों के पास पांच से सात बच्चे और उनके माता-पिता काउंसिंलिंग के लिए आ रहे हैं।
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. संजीव त्यागी ने बताया कि इस तरह की परेशानी को मनो-शारीरिक लक्षण कहा जाता है। यह परेशानी इसलिए आ रही है क्योंकि छात्रों की रुचि के विपरीत माता-पिता ने जबरदस्ती दूसरे विषय दिलवा दिए हैं।
परीक्षा नजदीक आने पर छात्र जब पढ़ाई करने बैठते हैं तो उनमें शारीरिक लक्षण के रूप में परेशानी सामने आ रही है। कई छात्रों के सिर में दर्द की परेशानी हो रही है। अगर माता-पिता बेटे या बेटी पर जबरदस्ती पढ़ाई का दबाव बनाते हैं तो उनमें गुस्सा आता है। इससे नींद पूरी नहीं हो रही है। खाना-पीना भी कम खा रहे हैं। इस कारण से परेशानी हो रही है। ऐसे में बच्चों से अधिक माता-पिता की काउंसिंलिंग की जरूरत है।