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Ghaziabad News: पत्नी की हत्या कर नाले के किनारे दफनाकर ऊपर से बाजरा बोने के दोषी पति को उम्रकैद

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गाजियाबाद। भोजपुर क्षेत्र में पत्नी की हत्या कर शव को नाले के किनारे गड्ढा खोदकर दफनाने और पुलिस को गुमराह करने के मामले में अदालत ने पति दिनेश कुमार को सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सुशील कुमार चतुर्थ ने दोषी पर 60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार दिनेश कुमार ने अपनी पत्नी अंजू की रात में अवैध संबंध के शक में घर के अंदर गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को कमरे में भूसे में छिपा दिया था। अगले दिन रात में गांव के पास तालाब और गंदे नाले के किनारे गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया। पहचान और हत्या का पता न चले, इसके लिए ऊपर बाजरा बो दिया था। इसके बाद पुलिस को अंजू के घर से भाग जाने की झूठी सूचना दी।


तीन दिन थाने के चक्कर काटती रही मां

मृतका की मां राजेश ने अदालत में बताया कि शादी के कुछ समय बाद से ही दिनेश उसकी बेटी अंजू को पसंद नहीं करता था। वह आए दिन उसके साथ लड़ाई-झगड़ा करता था। अंजू के दो बेटे और एक बेटी थे। दिनेश ने पहले अंजू के मायके में उसकी छोटी बहन सीमा को फोन कर पूछा कि क्या अंजू उसके यहां आई है। सीमा के मना करने पर उसने सास को फोन कर बताया कि अंजू कहीं भाग गई है।
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राजेश ने बताया कि उसने दिनेश से पूछा कि अगर अंजू भाग गई थी तो उसने उसे रोका क्यों नहीं और पड़ोसियों या पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। इसके बाद वह थाने पहुंची और तीन दिन तक पुलिस के चक्कर काटती रही। बाद में दिनेश ने बच्चों और अपनी कसम खिलाकर उसे किसी से कुछ न बताने को कहा। विश्वास दिलाने पर उसने अंजू की हत्या करने की बात बताई। राजेश ने पुलिस को जानकारी दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर प्रधान से लिखित शिकायत कराई।



दो फरवरी को दर्ज हुई गुमशुदगी

भोजपुर थाने में दो फरवरी 2023 को पिता सोमपाल सिंह ने अंजू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने दिनेश की निशानदेही पर गांव के पास तालाब और गंदे नाले के किनारे से शाम करीब साढ़े छह बजे शव बरामद किया। इसके बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना की गई। अदालत के आदेश के अनुसार करीब 34 वर्षीय अंजू की हत्या गला दबाकर और सिर की हड्डी तोड़कर कर की गई थी। मामले में हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।


बेटे और पिता मुख्य बयान से मुकर गए

मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे ने अपने पिता के पक्ष में गवाही दी। मृतका के पिता ब्रह्म सिंह भी जिरह के दौरान मुख्य बयान से विमुख हो गए। इसके बावजूद अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर दिनेश को दोषी ठहराया। बचाव पक्ष ने दिनेश को गरीब और मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाने वाला बताते हुए कम सजा देने की मांग की। कहा कि उसके तीन छोटे बच्चे हैं और यह उसका पहला अपराध है। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा की मांग की। अदालत ने तीनों धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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