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Ghaziabad News: दहेज हत्या के 12 साल पुराने मामले में पति को 8 साल की सजा

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गाजियाबाद। लोनी थाना क्षेत्र में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की हत्या के 12 साल पुराने मामले में अदालत ने पति को दोषी करार देते हुए आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में सास समेत अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली निवासी उषा का विवाह 12 दिसंबर 2008 को लोनी थाना क्षेत्र के गनोली गांव निवासी सतपाल के साथ हुआ था। आरोप था कि शादी के बाद से ही उषा पर मोटरसाइकिल और सोने की चेन लाने का दबाव बनाया जाता था। दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे लगातार प्रताड़ित किया जाता था। मामले के अनुसार 25 दिसंबर 2013 को उषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस समय वह सात माह की गर्भवती थीं। घटना के बाद ऊषा की मां लक्ष्मी देवी ने लोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बेटी के पति सतपाल, सास शांति देवी, दो जेठों और एक अन्य पर दहेज उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई एडीजे-7 कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने सतपाल को दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी माना।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि विवाह के सात वर्ष के भीतर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना के बाद उषा की मौत हुई थी, जिससे गर्भस्थ शिशु की भी जान चली गई। शनिवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने सतपाल को आठ वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य के अभाव में अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
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