गाजियाबाद। जीडीए से हाल ही में नगर निगम को हस्तांतरित हुई कॉलोनियों के निवासियों का गृहकर को लेकर बना संशय निगम ने दूर कर दिया है। इन कॉलोनियों में गृहकर मकान बनने की तारीख से वसूला जाएगा। वहीं, जलकर और सरचार्ज कॉलोनी के नगर निगम को हैंडओवर होने की तारीख से लिया जाएगा। निगम ने इसकी पूरी व्यवस्था तैयार कर ली है और कर सॉफ्टवेयर को भी इसी आधार पर अपडेट किया गया है।
प्रताप विहार, भाऊराव देवरस, मधुबन-बापूधाम, गोविंदपुरम के कई ब्लॉक और ट्रांस हिंडन क्षेत्र की बड़ी आबादी गृहकर को लेकर असमंजस में है। लोग आए दिन जोनल कार्यालय से लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर जानकारी कर रहे हैं कि उन्हें किस अवधि का गृहकर जमा करना होगा। इसे देखते हुए निगम ने स्थिति स्पष्ट की है।
अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव ने बताया कि सरचार्ज और जलकर को छोड़कर गृहकर उस तारीख से लगेगा, जिस दिन संबंधित मकान का निर्माण हुआ है। नगर निगम की नियमावली में इसका प्रावधान है। लोग गृहकर से संबंधित जानकारी के लिए अपने निकटतम जोनल कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। निगम की ओर से भी संबंधित भवन स्वामियों से संपर्क किया जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र से हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद
शहर का औद्योगिक क्षेत्र पहले नगर निगम के अधीन था। इससे निगम को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। औद्योगिक क्षेत्र यूपीसीडा को हस्तांतरित होने के बाद निगम को राजस्व का नुकसान हुआ है। अब जीडीए की कॉलोनियों के नगर निगम में शामिल होने से राजस्व बढ़ने की उम्मीद है। निगम का दावा है कि इससे औद्योगिक क्षेत्र से हुए राजस्व नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकेगी।
हालांकि, विभिन्न संशयों और अन्य कारणों से निगम में गृहकर जमा होने की रफ्तार अभी अपेक्षित नहीं है। वर्तमान में करीब डेढ़ लाख लोग ही गृहकर जमा कर चुके हैं। जीडीए से हस्तांतरित कॉलोनियों में अभी गृहकर जमा करने की शुरुआत भी नहीं हुई है। ओटीएस योजना के दायरे में आने वाले लोगों को छोड़ दें तो करीब पौने तीन लाख लोग अभी गृहकर जमा करने से वंचित हैं।