नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग एथॉरिटी (एनपीपीए) की ओर से कार्डियक स्टेंट की कीमतें तय किए जाने के बाद से शहर के अस्पतालों में आधुनिक स्टेंट की कमी हो गई है। ऐसे में मरीजों की हृदय धमनियों का ब्लॉकेज डॉक्टर आउटडेटेड कार्डियक स्टेंट से खोलने को मजबूर हैं।
फिलहाल डॉक्टर जिन स्टेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो शुरुआती दौर (फर्स्ट और सेकेंड जेनरेशन) के हैं जबकि इस वक्त मार्केट में आधुनिक (फोर्थ जेनरेशन) स्टेंट आ चुके हैं। अस्पतालों से फोर्थ जेनरेशन के स्टेंट गायब हो गए हैं।
आधुनिक स्टेंट की यह कमी अस्पतालों की ओर से नहीं हुई बल्कि कार्डियक स्टेंट बनाने वाली कंपनियों की वजह से हुई है। गत 13 फरवरी को स्टेंट की कीमतें तय करने का आदेश आने के बाद से महज छह दिन में ही इन कंपनियों ने अस्पतालों से हाई-एंड यानि फोर्थ जेनरेशन के कोरोनरी स्टेंट वापस मंगा लिए।
यशोदा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के जीएम शेखर झा ने बताया कि एनपीपीए के आदेश के बाद अस्पताल में प्राइसिंग पॉलिसी लागू कर दी गई है। इससे स्टेंट की उपलब्धता में दिक्कत आ रही है, जिसे दूर करने का प्रयास किया।
सीनियर इंटनवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डा. पवन शर्मा ने बताया कि हाई-एंड स्टेंट्स को लेकर दिक्कत चल रही है। मरीजों के लिए प्राइसिंग पॉलिसी बेहतर है लेकिन स्टेंट की शॉर्टेज को रोका जाना बेहद जरूरी है। मरीजों को समय पर इलाज मिलना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
हाल-फिलहाल में नहीं दूर होगी कमी
सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डा. असित खन्ना ने बताया कि ऑपरेशन हो रहे हैं लेकिन फर्स्ट और सेकेंड जेनरेशन के स्टेंट ही प्रयोग में लाए जा रहे हैं। हाल-फिलहाल में यह कमी दूर होने की उम्मीद नहीं है। हर जेनरेशन के साथ स्टेंट बेहतर हुए हैं। मरीज की बॉडी स्टेंट को बेहतर तरीके से स्वीकार करती है।
एनपीपीए के आदेश के बाद स्टेंट की कीमत
मेटल के कोरोनरी स्टेंट की कीमत 7260 रुपये निर्धारित कर दी गई, जिसके लिए अभी तक 80 हजार रुपये वसूले जा रहे थे। वहीं फोर्थ जेनरेशन के ड्रग एल्युटिंग और बायो रिजॉर्बेबल स्टेंट की कीमत 29600 रुपये नियत कर दी गई है। इन स्टेंट के लिए अभी तक डेढ़ से दो लाख रुपये वसूले जा रहे थे।