होलिका दहन का पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भद्रा रहित समय में विधि-विधान से होलिका पूजन और होलिका दहन किया जाता है। इस वर्ष बुधवार की शाम 6:29 से होलिका दहन का मुहूर्त शुरू है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पर्व-त्योहारों को मुहूर्त के अनुसार मनाना शुभ एवं कल्याणकारी है।
- होलिका दहन की विधि
पं. गिरीश मिश्रा ने बताया कि होलिका पूजन के समय सभी को एक लोटा जल, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल और नारियल आदि से पूजन करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका में अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी जाती है।
होलिका के चारों ओर कच्चे सूत को सात या तीन परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है। इसके बाद लोटे का शुद्ध जल और अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है। चावल और पुष्प का पूजा में उपयोग किया जाता है। पूजन करके पूजन के बाद जल से अर्घ्य दिया जाता है।
- होलिका दहन में उपले जलाने का महत्व
आचार्य देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि होली फसल के पकने का समय होता है। इस दौरान मौसम में आते परिवर्तन के कारण कीट-पतंगों के आक्रमण का भी समय होता है। इस समय वातावरण में चेचक के साथ ही अन्य कीटाणुओं का प्रकोप भी बढ़ जाता है।
गोबर के उपलों को जलाने से रोगों के कीटाणु नष्ट होते हैं और कीट-पतंगों से भी राहत मिलती है। इसकी राख शरीर पर मलने से चेचक आदि चर्म रोगों से रक्षा होती है। गोबर के उपलों के धुएं से वातावरण शुद्ध होता है।
- टीएचए में 150 से ज्यादा स्थानों पर होलिका दहन की तैयारी
टीएचए में कुल 150 से ज्यादा स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किए जाएंगे।
होलिका स्थान - दहन का तय समय
शिप्रा सनसिटी - शाम 7:00 बजे
वैशाली सेक्टर-4 - शाम 7:30 बजे
शक्तिखंड-1 - शाम 7:30 बजे
पार्श्वनाथ पैराडाइज - शाम 7:00 बजे
न्यायखंड-2 - रात 7:30 बजे
बृज विहार सी ब्लॉक - शाम 7:00 बजे