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हिंडन बचाने को आगे आईं संस्थाएं

Thu, 02 Jun 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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‌हिंडन - फोटो : अमर उजाला
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हिंडन की दुर्दशा को लेकर सामाजिक दो सामाजिक संस्थाएं आगे आई हैं। फैक्ट्रियों और कालोनियों से निकलने वाले सीवरेज को भले न रोक पा रही हो, लेकिन हिंडन के आसपास का वातावरण शुद्ध करने के लिए प्रयास करेंगी।
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पर्यावरण सचेतक समिति और उत्थान समिति पांच जून को पर्यावरण दिवस पर हिंडन किनारे पौधरोपण कर पक्षियों के लिए फिर पुराना वातावरण तैयार करने का प्रयास करेंगी।
पूर्व में हिंडन किनारे बड़ी संख्या में पेड़-पौधे थे।

विकास के नाम पर इन पौधों की भी बलि ली गई। वसुंधरा क्षेत्र में हिंडन किनारे अभी भी ग्रीन बेल्ट हैं, लेकिन जीटी रोड के आसपास पेड़ खत्म हो गए हैं। ऐसे में अब नदी के किनारे फिर से पौधरोपण किया जाएगा।
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पर्यावरण सचेतक समिति के अध्यक्ष विजयपाल बघेल ने बताया कि उनकी संस्था सिटी फारेस्ट के पास हिंडन किनारे पांच जून को वृहद स्तर पर पौधरोपण करेगी। जीटी रोड के पास हिंडन घाट पर भी अर्जुन के पेड़ लगाए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि बरसात शुरू होने पर हिंडन घाट पर दोबारा पौधरोपण किया जाएगा। विजयपाल बघेल का कहना है कि पक्षी ज्यादातर नदियों और झीलों के पास ही अपना बसेरा बनाते हैं। ऐसे में उन्हें पेड़-पौधों और एकांत वातावरण मिलेगा तो वह फिर हिंडन के पास अपना बसेरा बना सकते हैं।

वहीं हिंडन नदी के प्रदूषण को दूर करने के लिए सरकारी स्तर पर भी प्लानिंग की जा रही है। उत्थान समिति के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी संस्था भी हिंडन किनारे पौधरोपण करेगी और लोगों को नदी को बचाने के लिए जागरूक करेगी।

प्रधानमंत्री तक पहुंचेगा ‘हिंडन की दुर्दशा’ का मामला
हिंडन की दुर्दशा को लेकर शुरू की गई ‘अमर उजाला’ की समाचारों की श्रंखला को पर्यावरण प्रेमियों ने सराहा है। पर्यावरण प्रेमी संस्था से जुड़े सुदीप साहू इस प्रकरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ले जाएंगे।

उनका कहना है कि हिंडन को साफ किए बिना यमुना और गंगा को साफ करने की बात करना सपने के समान है। हिंडन के जरिए यमुना में बड़ी मात्रा में ‘जहरीला’ पानी पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।

वह हिंडन की दुर्दशा पर प्रकाशित हुए समाचारों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाकर हिंडन नदी की सुध लेने की गुहार लगाएंगे, जिससे नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कोई योजना बन सके।
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