गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से गठित हाई पावर्ड कमेटी को तत्काल प्रभाव से सक्रिय होकर ठोस कदम उठाने का आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति नियमित बैठकें करे, याचिकाकर्ताओं की कार्ययोजना पर निर्णय ले और एक सितंबर तक अपनी प्रगति रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की पीठ ने कहा कि समिति केवल औपचारिक बैठकें करने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति तैयार कर उसे लागू करने की दिशा में कदम उठाए।
उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार और नवगठित हाई पावर्ड कमेटी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि समस्या के समाधान के लिए तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं विनीत शर्मा और प्राजक्ता सिंघल की कार्ययोजना पर विचार कर उचित निर्णय ले। साथ ही बंदरों के आतंक से निपटने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी रणनीति तैयार करे। अदालत ने यह भी कहा कि समिति नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करे और उनकी कार्रवाई तथा अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख एक सितंबर को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने बताया 13 सदस्यीय कमेटी गठित
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इस उद्देश्य से 13 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति याचिकाकर्ताओं की प्रस्तावित कार्ययोजना का अध्ययन करेगी और उसके क्रियान्वयन के उपायों पर सुझाव देगी। सरकार ने यह भी बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान दीर्घकालिक शमन रिपोर्ट तैयार कर रहा है। जब तक अंतिम कार्ययोजना और संस्थान की अल्पकालिक रणनीति सामने नहीं आती, तब तक शहरी स्थानीय निकायों को शहरों से बंदरों को पकड़ने, उनका सुरक्षित परिवहन करने और उन्हें अन्य स्थानों पर छोड़ने की कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने अदालत को यह आश्वासन भी दिया कि वह बंदरों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए टिकाऊ और दीर्घकालिक योजना तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रेलवे स्टेशन पर भी बंदर का बढ़ा आतंक
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ और पवन कुमार तिवारी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि केवल राज्यस्तर पर निर्णय लेने के बजाय प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जिला स्तर पर निर्णय लेने से समस्या का अधिक प्रभावी समाधान संभव होगा। अदालत ने कहा कि हाई पावर्ड कमेटी इस सुझाव सहित सभी मुद्दों पर विचार करेगी।
सुनवाई के दौरान रेलवे स्टेशनों पर बंदरों के बढ़ते खतरे का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने समिति में रेलवे अधिकारियों को शामिल करने और स्टेशन स्तर पर वन विभाग, रेलवे तथा शहरी स्थानीय निकायों के बीच समन्वय तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड, जागरूकता संदेश तथा क्या करें और क्या न करें संबंधी निर्देश प्रदर्शित करने की भी सिफारिश की गई।
संयुक्त जिला स्तरीय समितियों के गठन का सुझाव
प्रस्तावित कार्ययोजना में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संयुक्त जिला स्तरीय समितियों के गठन का सुझाव दिया गया है। इनमें मुख्य विकास अधिकारी, नगर निकाय, वन विभाग, कृषि, उद्यान, पंचायत, बिजली विभाग, रेलवे और पशु कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की सिफारिश की गई है। इन समितियों की बैठक प्रत्येक माह या अधिकतम 60 दिन के भीतर आयोजित करने और जिले में बंदरों से संबंधित सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं और कार्ययोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इन्हें सौंपने का प्रस्ताव भी रखा गया है।