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स्वास्थ्य सेवाएं होंगी बेहतर... आधुनिक होंगे अस्पताल

Tue, 27 Dec 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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एमएमजी - फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस साल कई नई सुविधाएं मिलेंगी। आईसीयू, बर्न वार्ड, ट्रॉमा सेंटर, आइसोलेशन वार्ड और ब्लड बैंक के अलावा डाइलिसिस आदि की सुविधाएं मिलने से मरीजों को दिल्ली, नोएडा और मेरठ की ओर दौड़ लगाने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही प्राइवेट में महंगे इलाज के लिए भी नहीं जाना पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए पीएचसी और सीएचसी पर भी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। दूर दराज के गांवों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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1. एमएमजी में गंभीर रोगियों को मिलेगा आईसीसीयू 
एमएमजी अस्पताल में आईसीसीयू की सुविधा मिलेगी। इसके शुरू हो जाने से गरीब मरीजों को क्रिटिकल केयर के लिए प्राइवेट अस्पतालों के महंगे इलाज का रुख नहीं करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य विभाग की मानें तो स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जल्द ही आईसीयू भी बनकर तैयार हो जाएगा। फिलहाल आईसीयू की सुविधा न होने से या तो गंभीर मरीजों को दिल्ली-मेरठ रेफर करना पड़ता है या वे प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं।
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2. हटेगा बर्न वार्ड में लगा ताला 
इस वर्ष बर्न वार्ड शुरू हो जाएगा और बर्न के मरीजों को दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी होगी। सात वर्ष पहले एमएमजी जिला अस्पताल में जलने वाले मरीजों के लिए स्पेशल बर्न वार्ड बनाया गया था।

स्टाफ की कमी से यहां ताला लगा हुआ है। बर्न वार्ड के मरीजों को एयर कंडीशनर की जरूरत होती है लेकिन जनरेटर की सुविधा नहीं होने से यह दिक्कत रही। कुछ महीने ही बर्न के मरीजों को इस वार्ड की सुविधा मिली। बर्न के मरीजों के आने पर उन्हें दिल्ली के सरकारी अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इस साल यह दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

3. ट्रॉमा सेंटर को मिलेगा न्यूरो सर्जन और फिजिशियन 
नए साल से ट्रॉमा सेंटर शुरू जाएगा। सड़क हादसों में हेड इंजरी के मरीजों की जान बचाने के लिए ट्रॉमा सेंटर जरूरी है। गाजियाबाद चारों ओर से हाईवे से घिरा है और सड़क हादसे अन्य शहरों से ज्यादा होते हैं।

इसके चलते संयुक्त जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया। ट्रॉमा सेंटर को शासन के दबाव में शुरू तो कर दिया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल महज इमरजेंसी के तौर पर ही हो रहा है। ट्रॉमा के मरीजों को इलाज के लिए न्यूरो सर्जन और न्यूरो फिजिशियन यहां तैनात नहीं हैं। इस साल इनकी नियुक्तियां होने की उम्मीद है। 

4. संयुक्त जिला अस्पताल में बने भवन के शुरू होने की उम्मीद
सिर्फ एमएमजी अस्पताल में भी ब्लड बैंक की सुविधा थी, ऐसे में जरूरत पड़ने पर मरीजों को संजय नगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल से खून के लिए एमएमजी अस्पताल आना पड़ता है।

इसके देखते हुए संयुक्त जिला अस्पताल में ब्लड बैंक का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही आइसोलेशन वार्ड, माड्यूलर लांड्री और माड्यूलर किचन भी बनाया गया। छह महीने पहले लोकार्पण भी हो गया।

इसके बाद भी अभी तक ब्लड बैंक यहां शुरू नहीं हो सका है। आवश्यक स्टाफ की कमी के कारण इस साल भी इसे शुरू नहीं किया जा सका। नए साल में ये सुविधाएं मरीजों को मिलने लगेंगी। 

5. महिला अस्पताल को मिलेगा रेडियोलॉजिस्ट
महिला अस्पताल में भर्ती हैं और अल्ट्रासांउड की जरूरत है तो महिलाओं को एमएमजी अस्पताल आना होता है जबकि महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा वहीं होनी चाहिए।

महिला अस्पताल में रोज 15-20 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती है, लेकिन पिछले पांच साल से रेडियोलॉजिस्ट  नहीं होने के कारण गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। नए साल में उम्मीद है कि महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होगी।

6. डिजिटली स्मार्ट हो जाएंगे अस्पताल  
एक ओर देश डिजिटल इंडिया की राह पर चल रहा है वहीं सरकारी अस्पताल पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। जहां सभी सरकारी विभागों को हाईटेक करने की बात चल रही है वहीं सरकारी अस्पतालों में कंप्यूटराइज्ड पर्ची सिस्टम तक नहीं चल पा रहा है।

कंप्यूटराइज्ड सिस्टम शुरू होने के बाद सिर्फ कुछ ही महीने पर्ची निकल सकी, तब से मरीजों की मैनुअल पर्ची ही बनाई जा रही है। इंटरनेट और नेटवर्किंग की समस्या से जूझने की वजह से इसे बंद ही कर दिया गया। नए वर्ष से कंप्यूटराइज्ड सिस्टम शुरू होने की उम्मीद है। 

7. संजयनगर में शुरू होगी डायलिसिस की सुविधा 
अगर किडनी का रोग है तो शहर में प्राइवेट अस्पताल ही सहारा है। जो लोग महंगा इलाज नहीं करा सकते हैं, वे दिल्ली स्थित एम्स की दौड़ लगाते हैं। सरकारी स्तर पर डायलिसिस की सुविधा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

करीब छह वर्ष घोषणा के बाद भी इसे शुरू नहीं किया जा सका।  किडनी के गंभीर रोगियों के लिए सरकारी स्तर पर डायलिसिस की सुविधा संयुक्त जिला अस्पताल में शुरू होने वाली है। स्थान चिन्हित करने का काम पूरा हो गया है और उम्मीद है कि नए वर्ष में अप्रैल से इसे शुरू कर दिया जाएगा।


2016 में जो हुआ

- 20 करोड़ की लागत का आधुनिक सुविधाओं से लैस पांच मंजिला महिला अस्पताल शुरू हुआ
- जनपद को मिला आधुनिक शव वाहन
- डासना में पोषण पुनर्वास केंद्र हुआ शुरू
- पांच नई एंबुलेंस 108 सेवा के लिए व छह नई एंबुलेंस 102 मली
- टीबी के गंभीर मरीजों को लिए  डीआरटीवी सेंटर हुआ शुरू
- 17 नए अरबन हेल्थ पोस्ट और पीएचसी शुरू,  15 नई पीएचसी मिली की स्वीकृति
- एमएमजी में आइसीसीयू व संयुक्त अस्पताल में ब्लड यूनिट का निर्माण कार्य पूरा
- संयुक्त अस्पताल में 60 बेड का अतिरिक्त वार्ड बनकर तैयार

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खासकर गाजियाबाद में लगातार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और र्नई स्वास्थ्य योजनाएं शुरू हो रही हैं। सिर्फ स्टाफ की कमी की समस्या है, जिसे कुछ हद तक सुलझाया जा चुका है, नए साल में इसका पूरा समाधान हो जाएगा।
- सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल

संयुक्त जिला अस्पताल में अधिकतर नई सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं, कुछ शुरू होने वाली हैं। नवनिर्मित इमारतों के लिए स्टाफ भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उपकरण आ जाएंगे तो इनकी भी सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी। ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों को ऑन कॉल बुलाकर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।  - डा. दिनेश शर्मा, सीएमएस, संयुक्त जिला अस्पताल।


एमएमजी में अब होगा भरपूर स्टाफ 

एमएमजी अस्पताल में अब कम स्टाफ की समस्या दूर होने वाली है। शासन ने अस्पताल के लिए 31 स्टाफ नर्स की मंजूरी दे दी है। इनमें से 14 की तैनाती हो गई है। इसके अलावा वार्ड ब्वॉय और वार्ड आया की भी मंजूरी मिल गई है।

कई वर्षों से स्टाफ की कमी से जूझ रहे एमएमजी अस्पताल को अब राहत मिलने वाली है। शासन द्वारा अस्पताल के लिए स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वॉय और वार्ड आया की तैनाती के लिए मंजूरी मिल गई है। महज 17 स्टाफ नर्स के सहारे पूरे अस्पताल को चलाया जा रहा था, जिसकी वजह से काफी परेशानी आती थी।

कई बार नाइट शिफ्ट में एक स्टाफ नर्स के सहारे पूरा वार्ड चलता था लेकिन अब इसकी समस्या दूर होने वाली है। इस बार शासन से 30 स्टाफ नर्स की डिमांड की गई थी और शासन की ओर 31 की मंजूरी मिली यानि एक ज्यादा। इसमें से 14 स्टाफ नर्स ने ज्वाइन कर लिया है।

अभी 17 की तैनाती होनी बाकी है। इसके साथ ही सात वार्ड ब्वॉय और 12 वार्ड आया की भी मंजूरी मिल गई है, जल्द ही इनकी भी ज्वाइनिंग भी होगी। सीएमएस डा. जेके त्यागी ने बताया कि बाकी स्टाफ की तैनाती भी जल्द हो जाएगी। 

नए साल में दवा के लिए भटकना पड़ सकता है मरीजों को
 नए साल में मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ सकता है। शासन स्तर से दवा व्यापारियों के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता के बाद से व्यापारियों के सामने लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर समस्या पैदा हो गई है।

जनपद में करीब 800 दवा व्यापारी ऐसे हैं, जिनकी लाइसेंस की वैधता 31 दिसंबर के बाद खत्म हो जाएगी। उधर, व्यापारियों ने यह नियम खत्म करने के लिए डीएम को ज्ञापन भी सौंपा है।

प्रदेश शासन ने दवा व्यापारियों के लिए फार्मासिस्ट की अनिवार्यता की शर्त लगा दी है। ऐसा होने पर गाजियाबाद के दवा व्यापारी काफी परेशान हैं। गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी ने बताया कि जनपद में करीब तीन हजार रिटेल और दो हजार के करीब दवा के थोक विक्रेता हैं जबकि  फार्मासिस्ट काफी कम हैं।

यदि यह नियम अनिवार्य किया गया तो हजारों दवा व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे। मेडिकल स्टोर बंद होने से मरीज भी परेशान होंगे। उन्हें भी जरूरी दवाओं के लिए भटकना पड़ेगा।

ड्रग इंस्पेक्टर विवेक कुमार ने बताया कि लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करना है। आवेदन में फार्मासिस्ट का नंबर भरा जाना जरूरी है। इसके बाद दुकानों का भौतिक सत्यापन होगा। तब लाइसेंस को नवीनीकरण के लिए भेजा जाएगा। विभाग 31 दिसंबर के बाद से कार्रवाई शुरू करेगा।
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