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छात्राओँ की यनिफार्म उतरवाने के मामले में एससी/एसटी एक्त में केस

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छात्राओं की यूनिफार्म उतरवाने के मामले में एससी/एसटी एक्ट में केस
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हापुड़। दहीरपुर कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में 11 जुलाई को अनुसूचित जाति की कक्षा चार की दो छात्राओं की यूनिफार्म उतरवाए जाने के मामले में निलंबित की जा चुकीं दोनों शिक्षिकाओं सुनीता और वंदना के खिलाफ पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। एक छात्रा के पिता की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में शिक्षिकाओं पर छात्राओं की पिटाई करने और नाम काटने की धमकी देने का भी आरोप है। मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच जाने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी अर्चना गुप्ता ने विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
आठ और नौ साल उम्र की दोनों छात्राएं आपस में चचेरी बहन हैं। एक के पिता ने दर्ज एफआईआर मे बताया है कि शिक्षिकाओं ने दोनों बच्चियों की यूनिफार्म उतरवाकर अन्य बच्चों को दे दी थी। उन बच्चों के फोटो खींचे जाने थे। फोटो खिंचने तक दोनों बच्चियां बिना यूनिफार्म के रहीं। बच्चियों की यूनिफार्म उन बच्चों को दिलाई गई जो 11 जुलाई को स्कूल यूनिफार्म में नहीं आए थे। छात्रा के पिता का कहना है कि इस घटना के बाद से दोनों बच्चियां सहमी हुई हैं। आरोप है कि शिक्षिकाओं ने धमकी दी थी कि अगर घर पर जाकर इसके बारे में बताया तो स्कूल से उनका नाम काट दिया जाएगा। पुलिस ने केस 18 जुलाई की रात दर्ज किया है।
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आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश
इस मामले में शोषित क्त्रसंति दल के अध्यक्ष रविकांत ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला को ट्वीट किया था। आयोग ने पुलिस को कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया था। कई और संगठनों ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
जांच के आधार पर कार्रवाई
एएसपी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है। पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। जांच सीओ पिलखुवा को सौंपी गई है।
बच्चों ने की है घटना की पुष्टि
रिपोर्ट दर्ज कराने वाले छात्रा के पिता का कहना है कि इस घटना के बाद स्कूल के कई बच्चों से बात की गई। उन्होंने यूनिफार्म उतरवाए जाने की पुष्टि की है। उनसे बातचीत की वीडियो रिकार्डिंग मौजूद है।
अपलोड करने के लिए खींचे गए थे फोटो
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बच्चों की य?ूनिफार्म के लिए पैसा अभिभावकों के खाते में दिया गया है। शिक्षकों से कहा गया है कि इस पैसे से खरीदी गई यूनिफार्म में बच्चों के फोटो विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। इसीलिए यूनिफार्म में आए बच्चों के फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। इस मामले में सवाल यह है कि जो बच्चियां स्कूल यूनिफार्म में पहनकर नहीं आईं, उन्हें दूसरी बच्चियों की यूनिफार्म पहनाकर फोटो क्यों अपलोड किए गए।
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शिक्षिकाएं बोलीं - राजनीति के तहत कार्रवाई
शिक्षिका वंदना का कहना है, यह कार्रवाई राजनीति के तहत हुई है। मैं तो कक्षा छह, सात और आठ के बच्चों को पढ़ाती हूं, मेरा मामले से कोई लेना देना नहीं है। जिस व्यक्ति द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, वह स्कूल में विद्यालय शिक्षा समिति का अध्यक्ष बनना चाहता था, लेकिन विरोध के कारण उसका चयन नहीं हुआ। ऐेसे में उसके द्वारा रंजिशन रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सुनीता का कहना है कि स्कूल में किसी छात्रा की यूनिफार्म नहीं उतरवाई गई। पूरा प्रकरण गांव की राजनीति से प्रेरित है। शिकायतकर्ता स्कूल की समिति में कमीशन की डिमांड के उद्देश्य से शामिल होना चाहता था। जिसका कुछ ग्रामीणों ने ही विरोध किया था। इसके बाद किसी दूसरे व्यक्ति का इसके लिए चयन किया गया।
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