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दाम बढ़ने के इंतजार में रोका 1.80 लाख मीट्रिक टन आलू

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दाम बढ़ने के इंतजार में रोका 1.80 लाख मीट्रिक टन आलू
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हापुड़। आलू के दाम बढने की उम्मीद में जिले के कोल्ड स्टोरेज में 1.80 लाख मिट्रिक टन आलू रोक लिया गया है। थोक बाजार में आलू का 50 किलो का कट्टा 450 रुपये किलो ही बिक रहा है जबकि जून 2020 में भाव 1800 रुपये तक पहुंच गया था।
बीते वर्ष जिले में 33 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई। लॉकडाउन में लोगों ने घरों में आलू खरीदकर रखा तो दाम बढ़ते चले गए। थोक में 50 किलो का आलू का कट्टा 1800 रुपये का बिक गया। इसी को देखते हुए जिले के किसानों अबकी बार दो हजार हेक्टेयर ज्यादा बुआई की तो रकबा 35 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया। मौसम अनुकूल रहा और पैदावार भी रिकार्ड दो लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गई। ज्यादा पैदावार के बावजूद इस समय बाजार में आलू का भाव कम होने से किसान संकट में है।
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कोल्ड स्टोर का किराया भी बढ़ा रहा संकट
कोल्ड स्टोर में सामान्य आलू भंडारण के लिए 250 रुपये कुंतल और शुगर फ्री आलू के लिए 280 रुपये कुंतल लिए जाते हैं। इस समय बाजार में आलू का भाव 900 रुपये कुंतल है। इसमें से 250 से 280 रुपये कोल्ड स्टोर का किराया चला जाएगा। ऐसे में उत्पादक को सिर्फ 650 रुपये कुंतल ही पड़ेंगे। किसानों का कहना है कि इतने कम में उत्पादन लागत भी नहीं निकलेगी इसलिए इस समय आलू कोल्ड स्टोर से निकालने में घाटा ही घाटा है।
राहत योजना की उम्मीद
बीते वर्ष उद्यान विभाग ने हापुड़ के आलू को दूसरे प्रदेशों में बिक्री के लिए ले जाने वाले व्यापारियों को अनुदान की योजना लागू की थी। इसके बाद उत्पादकों और व्यापारियों ने दूसरे प्रदेशों में जाकर भी आलू बेचा। इस बार अभी तक यह योजना नहीं आ सकी हैै।
वर्षवार आलू के अधिकतम रेट प्रति 50 किलो
2021 में 900 रुपये
2020 में अधिकतम 1800 रुपये
2019 में अधिकतम 1200 रुपये
2018 में अधिकतम 1050 रुपये
जिले में आलू भंडारण की स्थिति
15 कोल्ड स्टोर हैं जिले में
1.90 लाख मीट्रिक टन है इनकी क्षमता
1.80 लाख मीट्रिक टन आलू है शीतगृहों में
36 हजार मीट्रिक टन आलू निकाला जा चुका है।
कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण का किराया
सामान्य आलू----250 रुपये/क्विंटल
शुगर फ्री आलू---280 रुपये/क्विंटल
ऐसे तो छोड़नी पड़ेगी आलूू की खेती
किसान आलू का मुनासिब दाम नहीं मिलने से बर्बाद हो रहा है। सरकार को राहत के के लिए कोई योजना लानी चाहिए वरना किसानों का आलू की खेती से मोहभंग हो जाएगा। संजीव चौधरी, आलू उत्पादक
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सरकार तय करे आलू का भाव
अबकी बार आलू की फसल से उम्मीद थी, लेकिन दाम कम होने से नुकसान हो रहा है। सरकार आलू का न्यूनतम मूल्य तय करे और उस पर बाजार में बिकवाने की व्यवस्था करे।
ज्ञानेश्वर त्यागी, किसान
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सिर्फ दो फीसदी आलू ही निकला
शीतगृहों से अभी दो फीसदी आलू की ही निकासी हो सकी है। कोरोना के चलते कुछ समस्याएं बनी हुई हैं, किसान अच्छे दामों के इंतजार में आलू रोके हुए हैं।
एसके शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी हापुड़
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