नाला बन गई काली नदी, बांट रही खतरनाक बीमारियां
हापुड़। जिले में नाला बनकर रह गई काली नदी मुजफ्फरनगर, मेरठ और हाप़ुड़ की 103 फैक्टरियों का 317 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन)सीवेज प्रतिदिन ढो रही है। सीवेज में खतरनाक रसायन होने की वजह से काली नदी अब आसपास के गांवों में खतरनाक बीमारियां बांट रही है। कई गांवों में भूगर्भ जल लगातार दूषित हो रहा है।
मुजफ्फरनगर से शुरू हुई काली नदी मेरठ होते हुए हापुड़ में प्रवेश करती है। जिले में इसकी लंबाई करीब 16 किलोमीटर है।यह नदी आगे बुलंदशहर, कासगंज होते हुए कन्नौज में गंगा में मिल जाती है। इसे कालिंदी भी कहा जाता है। नदी में फैक्टरियों सबसे ज्यादा सीवेज मेरठ में 287 एमएलडी और हापुड़ में (21 एमएलडी) मिलता है।
भृूगर्भ जल हुआ दूषित
काली नदी का पानी प्रदूषित होने की वजह से आसपास के गांवों में भूगर्भ जल में भी खतरनाक तत्व घुल रहे हैं। इन गांवाें में सिर्फ इंडिया मार्का हैंडपंप ही कामयाब हैं। हर तीन-चार साल में इनके बोरवेल की गहराई बढ़ानी पड़ती है। अधिकतर गांवों में नल का पानी कुछ देर रखने पर ही पीला पड़ जाता है। बर्तन भी जल्द खराब हो जाते हैं। यह पानी दुधारू पशुओं के लिए भी खतरनाक है।
इन गांवों में बढ़ रहीं कैंसर के मामले
जिले में काली नदी तट के गांव असरा, मुरादपुर, मतनौरा, मलकपुर, बिगास, गजालपुर, बाबूगढ़ छावनी, लालपुर, ततारपुर आदि सबसे अधिक प्रभावित हैं। नदी तट के गांवों में हाल के सालों में कैंसर, टीबी, हेपेटाइटिस सी और लिवर व किडनी की बीमारियां बढ़ी हैं।
एक मिल पर लग चुका है पांच करोड़ का जुर्माना
पानी को दूषित करने के मामले में हापुड़ की एक शुगर मिल पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है। लेकिन अभी तक इस जुर्माने से वसूली राशि का सही इंतजाम नहीं किया गया है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में की शिकायत
पर्यावरणविद् व जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने बताया कि इस मामले में वह राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत कर चुके हैं। यहां के पानी की बीते दिनों टेस्टिंग भी की गई है। काली नदी से कैंसर जैसी बीमारी फैल रही हैं, अब जिले में वह जल पंचायत अभियान चलाएंगे। इसमें बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाग कर रहे हैं।
हापुड़ में प्रस्तावित है बुलंदशहर रोड पर एसटीपी
काली नदी में शहर के कई बड़े नाले गिर रहे हैं। फिलहाल जिले में भले ही पानी के शोधन की कोई व्यवस्था न हो, लेकिन जल्दी ही हापुड़ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बुलंदशहर रोड पर बनाया जाएगा। जल निगम के अधिशासी अभियंता विनय रावत ने बताया कि इस प्लांट के निर्माण के बाद शहर के नालों का पानी ट्रीट होने के बाद ही काली नदी में गिरेगा।
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मेरठ में 220 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट जागृति विहार में बन रहा है। इसके बाद मेरठ से हापुड़ की सीमा में इस नदी का पानी काफी हद तक स्वच्छ रूप में प्रवेश करेगा। नदी में बिना शोधन सीवेज डालने वाली इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, योगेंद्र कुमार