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Ghaziabad News: रोडवेज बसों के धुएं में उड़ रहीं ग्रैप की धज्जियां

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ज्योती यादव
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साहिबाबाद। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप एक की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। पाबंदी के बावजूद वहीं गाजियाबाद रीजन के रोडवेज डिपो से संचालित हो रही प्रतिबंधित बसें भी नियमों की धज्जियां उड़ाती हुई सड़कों पर दौड़ रही हैं।
रीजन के विभिन्न डिपो से चल रही बसों के धुएं और उनके उत्सर्जन की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोनी, साहिबाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद डिपो में बड़ी संख्या में पुरानी बसें संचालित हो रही हैं। इनमें बीएस- 3-4 श्रेणी की बसें भी शामिल हैं, जो कि प्रतिबंधित हैं।
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परिवहन निगम के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लोनी डिपो में 32, साहिबाबाद में 30, हापुड़ में 28, बुलंदशहर में 19, खुर्जा में 30 और सिकंदराबाद डिपो से 30 बीएस-4 की बसें चल रही हैं। इन छह डिपो में ऐसी बसों की कुल संख्या 169 है। सिर्फ गाजियाबाद और कौशांबी डिपो से ही नई श्रेणी और सीएनजी बसों का संचालन हो रहा है। पुरानी बसों की संख्या और उनकी वास्तविक उत्सर्जन स्थिति को देखते हुए रीजन में बसों के बेड़े को आधुनिक बनाने और प्रदूषण जांच की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

संबंधित डिपो और उनके एआरएम का पक्ष
1. खुर्जा डिपो एआरएम राजेंद्र सिंह ने बताया कि डिपो में 116 बसें हैं, बीएस -4 की 30 बसें हैं। बीएस-3 की बसों को पूर्वी यूपी में ट्रांसफर कर दिया गया है। इन बसों को भी 15 दिन में बेड़े से अलग कर दिया जाएगा। फिर केवल बीएस-6 की 80 बसें रहेंगी।
2. बुलंदशहर डिपो एआरएम परमानंद ने बताया कि डिपो में फिलहाल 115 बसें हैं। बीएस -4 की 19 गाड़ियां हैं। बीएस -3 की बसें नहीं है। इन बसों को भी मार्च तक नीलाम किया जाएगा।
3. हापुड़ डिपो एआरएम लक्ष्मण सिंह ने बताया कि फिलहाल 132 बसें हैं। बीएस -3 की 21 और बीएस-4 की 7 बसें हैं।
4. साहिबाबाद डिपो एआरएम सतीश कुमार ने बताया कि 148 बसों में से बीएस -3 -4 की मिलाकर 36 बसें हैं। इनमें से 18 बसों की समय-सीमा मार्च में खत्म होगी।
5. लोनी डिपो एआरएम राजेश कुमार ने कहा कि उनके डिपो में बीएस -3 की 19 और बीएस -4 की 13 बसें हैं।


पुरानी बसों के धुएं से प्रदूषण बढ़ने की आशंका
पुरानी बसों में इंजन और अन्य पुर्जों के घिसने, रखरखाव में कमी या ईंधन के सही ढंग से न जलने की स्थिति में धुआं और प्रदूषक उत्सर्जन बढ़ सकता है। डीजल इंजन से निकलने वाले सूक्ष्म कण और नाइट्रोजन ऑक्साइड वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं। हालांकि, किसी बस के बीएस-4 मानक की होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वह निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषण फैला रही है। इसके लिए प्रदूषण जांच, पीयूसी प्रमाणपत्र, वाहन की फिटनेस और वास्तविक उत्सर्जन संबंधी रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
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-वर्जन-
गाजियाबाद और कौशांबी डिपो में केवल नई बसों का संचालन हो रहा है। कुछ डिपो में पुरानी बसें हैं मगर धीरे-धीरे उनकी भी नीलामी, ट्रांसफर और स्क्रैप कर बेड़े से हटाया जा रहा है। मार्च तक अधिकतर डिपो में नई बसें होंगी।
-केसरी नंदन चौधरी, आरएम, गाजियाबाद रीजन
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