जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के सपा सरकार के तमाम दावे सरकारी अस्पतालों में दम तोड़ रहे हैं। मेरठ मंडल में डॉक्टरों की कमी का रोना तो था ही अब दवाओं को भी टोटा हो गया है। हालात यह हैं गाजियाबाद में मरीजों को देने के लिए दवाएं उधार मंगाई जा रही हैं।
एडी हेल्थ की डीजी को लिखी गई चिट्ठी सरकारी अस्पतालों के इसी सच को बयां करती है, जिसमें उन्होंने अतिशीघ्र दवाएं की सप्लाई कराने की मांग की है। दवाएं अस्पताल में न मिलने से मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगी सपा सरकार उपलब्धियां गिना रही है। नए बने भवनों का आनन-फानन में लोकार्पण कराया जा रहा है। इन भवनों में न तो स्टाफ तैनात है और न ही उपकरण खरीदे गए हैं।
एडी हेल्थ मंजू शर्मा की मानें तो मेरठ मंडल के सभी अस्पतालों को मिलाकर लगभग 256 प्रकार की दवाइयों की कमी है। उन्होंने डीजी हेल्थ को पत्र लिखकर मांग की है कि जीवनरक्षक दवाइयों की जल्द आपूर्ति कराई जाए। इनमें से अधिकतर दवाएं सर्दी-जुकाम, आई ड्रॉप, बेहोशी की दवाएं या इंजेक्शन, ओरल बी सस्पेंशन, बुखार की दवाएं, आयरन के इंजेक्शन आदि हैं।
उधार पर चल रहे हैं अस्पताल
गाजियाबाद के अस्पतालों में हालांकि की दवाइयों की कमी नहीं है, लेकिन बजट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। अस्पतालों में बजट की उम्मीद में दवाएं फिलहाल उधार में खरीदी जा रही हैं। इनमें बेहोशी के इंजेक्शन, आयरन के इंजेक्शन सहित कई ऐसी दवाइयां हैं जिसकी लोकल खरीद की जाती है। दवाइयों के बजट के लिए कई बार अस्पतालों से पत्र लिखकर अवगत भी कराया गया है।
‘मंडल में दवाइयों की कमी है। सभी अस्पतालों से रिपोर्ट के बाद इस मामले में डीजी हेल्थ को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही शासन की ओर से सभी जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति कर दी जाएगी। - मंजू शर्मा, एडी हेल्थ।