जिलाधिकारी कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि दो सितंबर 2024 को सिकंदराबाद निवासी हर्ष अग्रवाल ने कोतवाली सिकंदराबाद पर तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी अनाज मंडी में ही दुकान है। दुकान पर नगर निवासी संदीप, अनुज सैनी और भूरा उर्फ मोहसीन नौकरी करते हैं। आरोपियों ने उनकी दुकान के गल्ले से पांच लाख रुपये चोरी कर लिए हैं। मामले में पुलिस ने तभी तीनों नामजद आरोपियेां के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(4) के तहत मुकदमा भी दर्ज कर लिया था।
जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए उसी दिन तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही आरोपियों के पास से चोरी की 1,02,237 रुपये भी बरामद कर लिए थे। आरोपियों से पूछताछ करने पर सामने आया कि उन्होंने चोरी की रकम से एक केटीएम बाइक और एक मोबाइल फोन भी खरीदा था। पुलिस ने बाइक और फोन दोनों कब्जे में ले लिए थे। जिसके बाद उक्त मुकदमे में बीएनएस की धारा 317(2) की वृद्धि कर दी। बाइक और मोबाइल फोन आरोपी संदीप ने खरीदे थे। जिसके बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 107(1) के तहत चोरी के रुपयों से खरीदी गई केटीएम बाइक और मोबाइल फोन को आरोपी के द्वरा अपराध कर प्रत्यक्ष रुप से अर्जित की गई संपत्ति माना।
इसके बाद न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने डीएम को गत 13 नवंबर को नियमानुसार कुर्की का आदेश दिया था। इसी के चलते गत 26 दिसंबर को डीएम के आदेश पर सिकंदराबाद कोतवाली में आरोपी संदीप से बरामद केटीएम बाइक व फोन की नीलामी कराई गई। बाइक की नीलामी 2,01,000 रुपये में और मोबाइल की नीलामी 16,900 रुपये में की गई। नीलामी से कुल 2,17,900 रुपये प्राप्त हुए। जिसे ट्रेजरी में जमा करा दिया गया। वहीं, अब बुधवार को डीएम एसएसपी ने पीड़ित को नीलामी की रकम 2,17,900 रुपये पीड़ित हर्ष अग्रवाल को चेक के रूप में प्रदान किए गए हैं। डीएम ने बताया कि बीएनएस के तहत की गई यह कार्रवाई देशभर में पहला मामला है।
क्या है बीएनएस की धारा 107(1)
- यह धारा, अपराधिक गतिविधियों से मिली संपत्ति की कुर्की, जब्ती, या पुनः स्थापना से जुड़ी है।
- यह धारा, कानून प्रवर्तन और न्यायिक प्राधिकारियों को अपराध की आय के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देती है।
- पुलिस अधिकारी, चल रही जांच के दौरान न्यायालय से संपत्ति कुर्क करने का अनुरोध कर सकते हैं।
- इस अनुरोध को एसपी या पुलिस आयुक्त को मंजूरी देनी होती है।