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डेढ़ घंटे की बजाए मेरठ पहुंचने में लग रहा चार घंटे से अधिक का समय

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मेरठ पहुंचने में डेढ़ की जगह लग रहे चार घंटे
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साहिबाबाद। गाजियाबाद से मेरठ जाने वाले यात्रियों की मुसीबत बढ़ गई है। रूट डायवर्जन के चलते मेरठ पहुंचने में बसों को अब डेढ़ की बजाए करीब चार घंटे का समय लग रहा है। वहीं यात्रियों को अतिरिक्त किराए का भुगतान भी करना पड़ रहा है।
कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली-मेरठ रोड पर बसों का संचालन बंद कर दिया गया है। अब रोडवेज की बसें हापुड़ होकर मेरठ जा रही हैं। रूट बदलने से मेरठ जाने वाले करीब 10 हजार यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। जहां पहले मेरठ जाने वाली बसें डेढ़ से दो घंटे में पहुंच जाती है, अब उन्हें चार से साढ़े चार घंटे लग रहे हैं। एनएच-9 पर वाहनों का दबाव अधिक होने की से एनएच-9 जाम हो रहा है। साथ ही मसूरी में जाम की समस्या बढ़ गई है। बसों को दिल्ली से मेरठ और मेरठ से दिल्ली पहुंचने में समय लग रहा है। आरएम एके सिंह का कहना है कि पहले मेरठ जाने वाली बसें दिन में तीन चक्कर लगाती थी। अब एक चक्कर भी मुश्किल से हो पा रहा है। जाम से बसों में डीजल भी अधिक लग रहा है।
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अधिक किराया यात्रियों की जेब पर भारी
रूट बदलने से दिल्ली-मेरठ जाने वाली बसों के किराए में भी बदलाव किया गया है। पहले यात्री करीब 51 रुपये खर्च कर मेरठ पहुंच जाता था। अब यात्री को 72 से 74 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। यात्रियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कांवड़ यात्रा जब तक रहेगी, तब तक परेशानी उठानी पड़ेगी।
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