एलआर कॉलेज की जमीन पर कैसे बना आईएमटी, सीसीएसयू ने मांगा जवाब
गाजियाबाद। साहिबाबाद के एलआर पीजी कॉलेज की जमीन पर बने आईएमटी गाजियाबाद के मामले में डिग्री कॉलेज प्रबंधन पर चौ. चरणसिंह विश्वविद्यालय का शिकंजा कसता जा रहा है। मामले की जांच सीसीएसयू की चार सदस्यीय कमेटी कर रही थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट पर अब विवि ने एलआर कॉलेज से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा है। विवि ने मान्यता की शर्तों का उल्लंघन कर कॉलेज की 54046 वर्ग गज जमीन पर आईएमटी गाजियाबाद के संचालन पर एलआर कॉलेज से जवाब मांगा है।
विवि कुलसचिव की ओर से एलआर कॉलेज प्रबंधन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कॉलेज की लाजपत राय स्मारक महाविद्यालय सोसाइटी ने एलआर कॉलेज की मान्यता के लिए जीडीए से 1971 में 90 वर्ग की लीज पर जमीन ली गई थी। इसके लिए कॉलेज के विकास शुल्क से 96606 रुपये का भुगतान किया गया था। भूमि पर वर्तमान में आईएमटी नामक संस्था चल रही है, जबकि यह जमीन विवि में संबद्धता की शर्तों के अनुसार अब तक बंधक है। ऐसे में विवि की अनुमति व बगैर अनुमोदन के कॉलेज ने किस अधिनियम के तहत यह जमीन आईएमटी को दी, यह स्पष्ट करना होगा।
विवि ने कहा है कि कॉलेज की स्थापना के समय सोसाइटी का नाम लाजपत राय स्मारक महाविद्यालय सोसाइटी था, लेकिन फिर विवि की अनुमति के बगैर सोसाइटी का नाम बदलकर लाजपत राय कॉलेज सोसाइटी और तीसरी बार लाजपत राय एजुकेशनल सोसाइटी कर दिया गया। कॉलेज प्रबंधन के यह परिवर्तन प्रथम सोसाइटी द्वारा निर्धारित नियमों और विनियम का साफ उल्लंघन है। विवि ने इस संबंध में कोई अनुमति प्रदान नहीं की, न ही बदलाव के बाद कॉलेज प्रबंधन ने कोई अनुमोदन कराया। यह भी सरासर मान्यता की शर्तों का उल्लंघन है।
कॉलेज में संचालित सभी कोर्सेज की प्रमाणित जानकारी मांगी
सीसीएसयू ने एलआर पीजी कॉलेज प्रबंधन से वर्तमान में कॉलेज की ओर से चलाए जा रहे सभी परंपरागत कोेर्सेज, व्यावसायिक कोर्सेज के संचालन की तिथि सहित विस्तृत जानकारी मांगी है। कॉलेज से सभी प्रमाण-पत्रों के साथ विस्तृत ब्यौरा जमा करना होगा। विवि ने एलआर कॉलेज की मान्यता के वक्त जमीन संबंधित गाटा संख्या पर सवाल उठाते हुए भूमि के माप की राजस्व के अभिलेखों के अनुसार साक्ष्यों की जानकारी मांगी है।
विवि शासन को भेजेगा विस्तृत रिपोर्ट
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने एलआर पीजी कॉलेज की जमीन पर राजनगर स्थित आईएमटी गाजियाबाद के निर्माण की जांच को मुख्यमंत्री व राज्यपाल से शिकायत की थी। शिकायत को संज्ञान में लेकर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को समुचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जमीन विवि में बंधक होने से सीसीएसयू ने भी जांच को चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। अब विवि को राज्यपाल कार्यालय को सभी सूचनाएं देनी हैं। विवि ने साफ किया है कि राज्यपाल कार्यालय के आदेशानुसार उन्हें सभी सूचनाएं भेजी जानी हैं। ऐसे में कॉलेज को हर हालत में सात दिनों के अंदर जानकारी उपलब्ध करानी होगी। जानकारी न देने पर आगे की कार्रवाई के लिए कॉलेज के खुद जिम्मेदार होने की बात कही गई है।
11503 वर्ग मीटर अतिरिक्त जमीन का शासन में मामला
आईएमटी में अवैध रूप से कब्जे वाली 11503 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन पहले रद्द हो चुका है। आईएमटी प्रबंधन की याचिका पर हाईकोर्ट ने शासन को भू-आवंटन पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे। शासन के निर्देश पर आईएमटी प्रबंधन ने जीडीए में पांच करोड़ जमा करा दिए हैं। ऐसे में अब जल्द ही प्रमुख सचिव आवास की ओर से इस मामले में फैसला लिया जाना है। बता दें कि जीडीए सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने जमीन संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के चलते प्राधिकरण ने आईएमटी के कब्जे वाली 11503 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई थी।