बिल्डरों पर कसेगा शिकंजा, 9500 खरीदारों को मिलेगी राहत
गाजियाबाद/साहिबाबाद। सुप्रीम कोर्ट की आम्रपाली बिल्डर पर की गई कार्रवाई से सालों से फ्लैट के पजेशन का इंतजार कर रहे खरीदारों को आशा की किरण दिखी है। पजेशन देने में देरी करने वाले बिल्डरों पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को कार्रवाई करने और छह माह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में महानगर के नामी बिल्डरों के छोटे-बड़े 30 प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए फंसाए बैठे करीब 9500 खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मंत्री समूह के तमाम प्रयासों और एफआईआर के बावजूद 3000 फ्लैट के खरीदारों को अब तक पजेशन नहीं मिला है। खरीदारों और बिल्डरों के फ्लैट पजेशन सहित अन्य विवादों के समाधान को अगस्त 2018 में मंत्री समूह का गठन हुआ था। चेतावनी व एफआईआर के बावजूद आधा दर्जन बिल्डरों ने 3000 फ्लैटों का पजेशन नहीं दिया है। इनमें राजनगर एक्सटेंशन स्थित मंजू जे होम्स में 786 आवंटियों, जीटी रोड अर्थला पर पार्श्वनाथ एक्जोटिका में 858 लोगों, एनएच-9 पर हिंडन नदी पुल से सटी रक्षा विज्ञान सहकारी समिति के प्रोजेक्ट के 1120 फ्लैट शामिल हैं।
दूसरी ओर एनएच-9, राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक , वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, साहिबाबाद, सिद्धार्थ विहार और दिल्ली-मेरठ हाईवे पर कई नामी बिल्डरों के प्रोजेक्ट में सालों बीतने के बावजूद लोगों को पजेशन नहीं मिल सका है। इनमें एनएच-9 से सटे सिद्धार्थ विहार और वेव सिटी में सर्वाधिक लोगों को अपने घर का इंतजार है। वेव सिटी में घर देने में देरी और धोखाधड़ी के मामले में निदेशक की गिरफ्तारी हो चुकी है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगेगी और खरीदरों को राहत मिलेगी।
टीएचए में कई प्रोजेक्ट लेट, कार्रवाई का असर नहीं
टीएचए में आधा दर्जन से अधिक प्रोजक्ट में आवंटियों का पैसा फंसा हुआ है। प्रोजेक्ट अपने डेडलाइन से कहीं अधिक लेट चल रहे हैं। वसुंधरा सेक्टर-तीन में जेएमसी का प्रोजेक्ट 2010 में शुरू हुआ था। इसमें 60 लाख से एक करोड़ तक के 384 फ्लैट के लिए आवंटियों ने करीब नब्बे फीसदी तक राशि जमा कर दी है। तीन मंजिल तक निर्माण भी हो गया है, लेकिन बिल्डर ने आवास विकास को समय से राशि नहीं चुकाई। इस कारण जनवरी 2018 में आविप ने प्रोजेक्ट पर सील लगा दी। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इंदिरापुरम के कनावनी पुलिया के पास सर्वोत्तम श्री बिल्डर को एएलटी सहकारी समिति के 150 सदस्यों को 2016 तक फ्लैट दिए जाने थे। पांच साल बीतने के बावजूद पजेशन नहीं मिला है। टीला मोड़ स्थित भारत सिटी फेज दो में 2013 से खरीददार पजेशन का इंतजार कर रहे हैं। वसुंधरा सेक्टर-15 स्थित शिखर एंक्लेव में 216 आवंटियों को 2013 में पजेशन देना था। 50 फीसदी को अभी पजेशन नहीं मिला है। गंगा यमुना हिंडन अपार्टमेंट में कई काम अधूरे रहने के कारण 2200 फ्लैट में आधे आवंटी भी रहने नहीं आए हैं। इसी तरह वसुंधरा सेक्टर दो स्थित एसजी ओसिस, सेक्टर 3 स्थित केएसएन स्कावायर, इंदिरापुरम स्थित एपेक्स प्रोजेक्ट डेडलाइन से काफी लेट चल रहा है।
गरीबों के ईडब्ल्यूएस-एलआईजी देने में भी देरी
इंटीग्रेटेड के साथ हाईटेक टाउनशिप योजना में छह बिल्डरों ने अब तक 4785 ईडब्ल्यूएस व एलआईजी का पजेशन नहीं दिया है। इनमें सबसे ऊपर उप्पल चड्ढा और क्रॉसिंग्स है। क्रॉसिंग्स में तो 25 जुलाई से 496 ईडब्ल्यूएस व 466 एलआईजी का जीडीए शिविर लगाकर पजेशन लेटर देना शुरू कर देगा, लेकिन उप्पल चड्ढा के ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के पजेशन में वक्त लग सकता है। वेव सिटी में उप्पल चड्ढा ने 432 ईडब्ल्यूएस व 500 एलआईजी फ्लैटों का अब तक पजेशन नहीं दिया है। सामग के प्रोजेक्ट में 360 ईडब्ल्यूएस व 360 एलआईजी, अंसल के प्रोजेक्ट में 256 ईडब्ल्यूएस व 208 एलआईजी, एसएमवी के प्रोजेक्ट में 209 ईडब्ल्यूएस व 220 एलआईजी और आदित्य वर्ल्ड सिटी में अग्रवाल एसोसिएट्स के प्रोजेक्ट में 236 ईडब्ल्यूएस व 240 एलआईजी का पजेशन बिल्डरों ने नहीं दिया है।