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शिप्रा को बगैर शुल्क दी अतिरिक्त एफएआर, जीडीए को 446 करोड़ की चपत

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शिप्रा को बगैर शुल्क दी अतिरिक्त एफएआर, जीडीए को 446 करोड़ की चपत
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम में जीडीए और शिप्रा एस्टेट बिल्डर के संयुक्त प्रोजेक्ट में नियमों की हुई अनदेखी में जीडीए का 446 करोड़ की चपत लगी। आरडब्ल्यूए की सहमति के बगैर पहले तो शिप्रा बिल्डर को 1.5 फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) की जगह 2.5 एफएआर दे दी गई। नियमानुसार जीडीए को बिल्डर ने तय राशि का भुगतान नहीं किया। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने अधिकारियों व बिल्डर की मिलीभगत से जीडीए को हुए करोड़ों के नुकसान का आरोप लगाया है। उन्होंने करोड़ों के इस घपले की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
आरडीसी में हुई पत्रकार वार्ता में भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि कनावनी गांवों के किसानों की जमीन लेकर जीडीए ने इंदिरापुरम कॉलोनी विकसित की थी। फिर 1991 से 1993 के बीच 148 हेक्टेयर पर 14 मंजिला टावर का निर्माण किया गया। इंदिरापुरम में एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के गिरने से सभी निर्माणों को रोक दिया गया। फिर बोर्ड के फैसले के आधार पर 11 मई 1994 में इन टावरों के यथा स्थिति में बेचने को निविदाएं आमंत्रित की गई। इसमें जीटीपीएल कंपनी के साथ जीडीए ने एमओयू साइन किया। फिर विभिन्न घटनाक्रम के बाद राशि का भुगतान न करने पर जीडीए ने एमओयू निरस्त कर दिया।
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उन्होंने बताया कि इसके बाद इंदिरापुरम में शिप्रा एस्टेट लिमिटेड ने मार्च 2000 में सर्वाधिक 106.31 करोड़ की बोली लगाई, जिसे जीडीए ने स्वीकार कर लिया। फिर जीडीए व शिप्रा एस्टेट के बीच जनवरी 2001 में एमओयू साइन किया गया। इस वक्त स्वीकृत एफएआर 1.5 थी। इसमें जीडीए को ही मानचित्र स्वीकृत करने और रजिस्ट्री का अधिकार था। लेकिन 2014 में बगैर आरडब्ल्यूए और आवंटियों की सहमति के संशोधित नक्शा पास करते हुए जीडीए ने 22.31 हेक्टेयर भूमि के लिए 1 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर बिल्डर को दे दी। उस वक्त इंदिरापुरम का सर्किल रेट 50 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर था। बिल्डर से अतिरिक्त एफएआर की राशि नहीं वसूलने के कारण जीडीए को सीधे 446 करोड़ का नुकसान हुआ। इस मौके पर भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल, सचिन सोनी सहित आदि लोग मौजूद रहे।
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पार्क और खाली जगह खड़ा कर दिया बहुमंजिला टावर
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने बताया कि जीडीए ने शिप्रा एस्टेट का 2014 में संशोधित नक्शा पास करने व बिल्डर को अतिरिक्त एफएआर देने के मामले में सीधे तौर पर यूपी अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन किया है। इसमें अतिरिक्त एफएआर देने के साथ 22.31 हेक्टेयर भूमि जो कि 2003 के नक्शे में पार्क और खाली स्थान में दर्शाई गई थी, शिप्रा एस्टेट ने अन्य बिल्डर को दे दी। इस भूखंड पर बगैर आरडब्ल्यूए व आवंटियों की सहमति के बिल्डर ने बहुमंजिला टावर खड़ा कर दिया है। अतिरिक्त एफएआर देने, खाली जगह पर बनाए गए टावर व अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन करने के मामले में आरडब्ल्यूए ने हाईकोर्ट में वाद दायर किया है। मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।-
कोट...
शिप्रा एस्टेट का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में मामले में टिप्पणी नहीं की जा सकती है। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए
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