पहले विकास कराया, फिर बुल्डोजर चलाया
गाजियाबाद। खराब वित्तीय दौर से गुजर रहे नगर निगम में धन की बर्बादी पर अंकुश नहीं है। नगर निगम खुद ऐसी कॉलोनियों में विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च चुका है, जिन पर बाद में बुल्डोजर चलाया गया। कॉलोनियों में सड़क, सीवर, बिजली, पानी की सुविधाएं देने से पहले निगम अफसरों ने यह नहीं देखा कि सरकारी जमीन कब्जा करके आबादी बसा दी गई है। नगर निगम तीन कॉलोनियों में इसी तरह सुविधाएं देने के बाद बिल्डिंगों पर बुल्डोजर चला चुका है और अब चौथी कॉलोनी में मकानों को तोड़ने के लिए चिह्नित कर लिया गया है।
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झील की जमीन पर बसी कॉलोनी, निगम ने दी सुविधाएं
अर्थला झील की जमीन को कब्जा करके लोगों ने यहां कॉलोनी बसा दी है। यहीं, पार्षदों के प्रस्ताव पर नगर निगम के अधिकारी यहां सड़क, हैंडपंप और बिजली की सुविधाएं भी दे चुके हैं। पहले हाईकोर्ट और फिर एनजीटी के आदेश के बाद नगर निगम ने खुद झील की जमीन पर बसी कॉलोनी में बुल्डोजर चलाकर मकान तोड़े। हालांकि कब्जा पूरी तरह खाली नहीं हो पाया, लेकिन नगर निगम के करोड़ों रुपये बर्बाद हुए।
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नंदग्राम में सड़क बनवाई, फिर मकान तोड़े
नंदग्राम क्षेत्र में शांति कॉलोनी में नगर निगम ने पहले इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर गलियों का निर्माण कराया, बिजली के खंभे लगवाए, स्ट्रीट लगवाई। बाद में राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए जमीन कम पड़ी तो सरकारी जमीन बताकर इस कॉलोनी में बने 13 मकानों और प्लाटों पर बुल्डोजर चलवाकर सड़कें और बिजली के खंभे भी उखाड़ दिए गए। नगर निगम ने अभी भी 103 और मकानों को तोड़ने के लिए चिह्नित किया हुआ है, राजनीतिक दबाव के कारण फिलहाल बुल्डोजर नहीं चलाया जा रहा है।
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अकबरपुर-बहरामपुर और सर्वोदय नगर में चलाया गया बुल्डोजर
विजयनगर जोन के अकबरपुर-बहरामपुर और सर्वोदय नगर में आलीशान मकानों वाली बस्तियों में भी नगर निगम बुल्डोजर चला चुका है। सर्वोदय नगर में इसी साल निगम ने ग्रीन बेल्ट की जमीन बताकर मकानों को ध्वस्त कराया। जबकि पूर्व में यहां पार्षदों की सिफारिश पर यहां 60-70 लाख से ज्यादा बजट से विकास कार्य कराए गए।
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अब मरियम नगर में चिह्नित किए गए भवन
नगर निगम ने अब नंदग्राम के मरियम नगर में 100 से ज्यादा मकानों को सरकारी जमीन पर बने होने का दावा कर चिह्नित किया है। इन मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। पूर्व में नगर निगम सड़क, बिजली, पानी की सुविधा दे चुका है। जल निगम की ओर से भी यहां सीवर लाइन डाली गई थी। इस कॉलोनी में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का सरकारी फंड खर्च हो चुका है। अब नगर निगम इन मकानों में रहने वाले लोगों के खिलाफ तहसील स्तर से बेदखली के नोटिस जारी करा रहा है। स्थानीय लोगों ने अपने आशियानों को बचाने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की है।
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कॉलोनी बसा रहे कालोनाइजर, सड़क और नाले बनवा रहा निगम
नगर निगम ऐसी प्राइवेट कॉलोनाइजरों की कॉलोनियों में भी सड़कें बनवा रहा है जिन्हें जीडीए अवैध घोषित कर कई बार कार्रवाई भी कर चुका है। कॉलोनाइजर यहां प्लाटिंग और मकान बनाकर मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, सीवर की सुविधाएं नगर निगम अफसरों और पार्षदों से सांठगांठ कर दिला रहे हैं। जो काम कॉलोनाइजरों को कराने थे, उन पर करोड़ों रुपये का खर्च नगर निगम कर रहा है।
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बयान
नगर निगम अवैध और सरकारी जमीन पर बनी कॉलोनियों में तो विकास कार्य करा रहा है, लेकिन जहां जरूरत है, वहां काम नहीं कराए जा रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है। - जाकिर सैफी, निगम पार्षद
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विकास कार्य पूर्व में कराए गए हैं। अब लैंड बैंक बनाया जा रहा है तो सरकारी जमीनों की पूरा ब्यौरा भी दर्ज किया जा रहा है। पता चल जाएगा कि कहां सरकारी जमीन पर निर्माण कर लिया गया है। उन्हें खाली कराया जाएगा। ऐसी जगह चिह्नित हो जाने से निर्माण कार्य कराने से पहले इसका पता भी चल जाएगा कि जमीन सरकारी है या नहीं। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त