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भूखंड आवंटन धांधली में यूपी डेस्को के अधिकारी व एजेंट को सजा

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भूखंड आवंटन धांधली में यूपी डेस्को के अधिकारी व एजेंट को सजा
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गाजियाबाद। वर्ष 2005 में नोएडा प्राधिकरण में हुए भूखंड आवंटन घोटाले में अदालत ने यूपी डेस्को के अधिकारी राम शंकर सिंह और एजेंट आलोक सिंह चौहान को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांक सिंह की अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही अदालत ने सही तरह से विवेचना न करने पर सीबीआई पर टिप्पणी भी की।
नोएडा विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2004 में विभिन्न श्रेणियों के 1250 भूखंड आवंटित करने की योजना निकाली थी। आवेदन और ड्रा कराने के लिए यूपी डेस्को का चयन किया गया था। पहले यह कार्य टीसीए द्वारा किया जाता था, लिहाजा यूपी डेस्को का चयन होते ही सवाल खड़े हो गए। इसके अलावा आवेदन की तारीख बार-बार आगे बढ़ाई गई। 2 जुलाई 2005 में नोएडा सेक्टर-21 स्टेडियम में यूपी डेस्को के अधिकारी राम शंकर सिंह, बाहरी एजेंट आलोक सिंह चौहान और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की मौजूदगी में ड्रॉ निकाला गया। काफी लोग पहुंचे, लेकिन किसी भी आम आदमी का ड्रॉ नहीं निकला। जो भी ड़ॅ निकले, वह रसूखदारों के थे। इसी बात को लेकर हंगामा शुरू हो गया। धांधली के आरोप लगने पर प्राधिकरण ने दो दिन बाद ही आवंटन निरस्त कर दिए।
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हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी सीबीआई जांच
एक आवेदक ने धांधली के मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। साथ ही निर्देश दिया था कि धांधली में लिप्त अधिकारियों को बेनकाब करने के लिए सीबीआई गहनता से जांच करे। सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच की। 2010 में सीबीआई ने यूपी डेस्को के अधिकारी राम शंकर सिंह और एजेंट आलोक सिंह चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया।
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कोर्ट ने की टिप्पणी- सीबीआई ने ठीक से नहीं की विवेचना
कोर्ट ने सीबीआई की विवेचना पर सवाल खड़े करते हुए टिप्पणी की है कि सीबीआई ने मामले की विवेचना ठीक से नहीं की। नोएडा प्राधिकरण, यूपी डेस्को, तत्कालीन सरकार के अधिकारियों व रसूखदार आवंटियों की भूमिका उजागर नहीं हुई। इनकी मिलीभगत के बिना यह धांधली संभव नहीं थी। कोर्ट ने यह टिप्पणी सीबीआई के मुखिया को भेजी है।
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