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मरम्मत का २२ लाख बजट फाइलों में खर्च, शहर में सूख गए सरकारी हैंडपंप

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मरम्मत का 82 लाख बजट फाइलों में खर्च, सूख गए हैंडपंप
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गाजियाबाद। सरकारी हैंडपंप की मररम्मत के लिए पिछले साल 82 लाख रुपये फाइलों में खर्च हो गए। महानगर के वार्ड-95 में जस्सीपुरा, गोशाला रोड, कैलाभट्टा, भैरो मंदिर, दूधेश्वरनाथ मंदिर के पास लगे आठ हैंडपंप में खराब हैं। गोविंदपुरम से सटे आकाश नगर क्षेत्र में पानी का संकट बढ़ गया है। इस क्षेत्र में लगे 22 हैंडपंप घरों में पानी की जरूरत को पूरा करते हैं। इनमें 12 हैंडपंप खराब हैं। शहरी और देहात क्षेत्र में मरम्मत और रखरखाव न होने से किसी का हत्था गायब है तो किसी हैंडपंप की बॉडी का छोटा पार्ट बचा है। ऐसी ही स्थिति शहर में मालीवाड़ा, लालकुआं, हरसांव की है।
महानगर की आबादी 24 लाख और ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या करीब 20 लाख से अधिक है। शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में जल निगम ने लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए हैं, मगर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता और देखरेख के अभाव में 850 सरकारी इंडिया हैंडपंप खराब हो गए हैं। नगर निगम ने महानगर में आठ हजार और ग्रामीण क्षेत्र में पांच हजार से अधिक हैंडपंप लगे हैं। वार्ड 95 केपार्षद जाकिर सैफी ने बताया कि उनके वार्ड में आठ हैंडपंप हैं और सभी खराब हैं। उन्होंने बताया कि दूधेश्वर नाथ मंदिर वाली गली, जस्सीपूरा दरगाह के आगे, गोशाला रोड, जस्सीपूरा गली नंबर-3, कैला भट्ठा नंबर-4, भैरों मंदिर वाली गली, राशन की दुकान के आगे रहने वाले लोग सरकारी हैंडपंप पर निर्भर रहते हैं। यहां पर नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये हाल है। नलकूप की मोटर खराब होने के बाद जनता के पास हैंडपंप का ही विकल्प बचता है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी इन्हें ठीक नहीं कराते है।
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150 की आबादी पर एक हैंडपंप
सरकारी मानकों के अनुसार पूर्व में जहां 250 की जनसंख्या पर एक हैंडपंप लगाया जाता था। अब यह मानक 150 लोगों की आबादी पर कर दिया गया है। साथ ही एक हैंडपंप से दूसरे हैंडपंप की दूरी 75 मीटर होनी चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। वीआईपी अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए जल निगम को हैंडपंप लगाने का आदेश देता है। शहर में नगर निगम तो देहात में हैंडपंपों का रखरखाव ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। सरकारी विभागों ने हैंडपंपों की निगरानी से मुंह मोड़ लिया है। यही कारण है कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर भले ही ग्राम पंचायतों के सरकारी खजाने से धन खर्च हो रहा हो, लेकिन धरातल वह नजर नहीं आ रहा।
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केस-1
जमींदोज हो गए हैंडपंप
जिले में रखरखाव के अभाव में हर साल सैकड़ों हैंडपंप जमीदोज हो गए हैं, लेकिन नगर निगम और जल निगम को इनकी फिक्र नहीं है। सरकारी हैंडपंप की उम्र दस साल आंकी जाती है, वह एक-दो साल में ही खराब हो जाता है। बीते पांच साल में शहर और देहात में जमींदोज हुए हैंडपंपों की संख्या 800 से भी अधिक है। इससे साफ है कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। वहीं गिरते भूगर्भ जल स्तर और दूषित होते भूगर्भ जल के कारण जनता को स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकारी हैंडपंप लगाने की योजना शुरू की थी।
केस-2
मालीवाड़ा से चोरी हो गया हत्था
शहर के बीचो-बीच मालीवाड़ा मोहल्ले में लगे हैंडपंप का हत्था गायब है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली की समस्या होने या घरों में किसी कारण से पानी नहीं आने पर सरकारी हैंडपंप से पानी भर लेते थे। कई हैंडपंप खराब हैं। नगर निगम में कई बार शिकायत की गई है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
केस-3
आकाश नगर में 12 हैंडपंप खराब
आकाश नगर कॉलोनी में 22 में से 12 सरकारी हैंडपंप ऐसे हैं, जिनसे पानी नहीं आ रहा है। यहां के अधिकतर लोग बिजली की समस्या होने पर इन हैंडपंप से ही काम चलाते हैं। घनश्याम फार्म हाउस के पास अंबेडकर इंटर कॉलेज के सामने, 32 फुटा रोड पर इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो साल से इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।
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वर्जन...
खराब हैं हैंडपंप, पीने लायक नहीं है पानी
आकाश नगर में अधिकर सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई अमल नहीं हुआ। जो हैंडपंप चल रहे हैं। उनका पानी पीने योग्य नहीं है। किसी का हैंडल टूटा हुआ है तो कोई नीचे की पटरी से गायब है।
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कपिल, निवासी आकाश नगर
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नहीं करता कोई सुनवाई
मालीवाड़ा में सभी सरकारी नल खराब है। एक-दो नल ही मुश्किल से चल रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को बड़ी समस्या हो रही है। नगर निगम का कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। राजू शर्मा, निवासी मालीवाड़ा
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शिकायत पर कर रहे हैं समाधान
हैंडपंप की लगातार मरम्मत कराई जा रही है। जहां से भी लोगों की शिकायतें आती हैं, उनका तत्काल निस्तारण कराया जा रहा है। हैंडपंप का रीबोर भी करा रहे हैं।
योगेंद्र यादव, एक्सईएन नगर निगम
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