राष्ट्रपति से सम्मानित राशिद और हिफ्जा की छूटी पढ़ाई
गाजियाबाद। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने वाले कुशलिया गांव के राशिद और उसकी बहन हिफ्जा की प्रतिभा को आर्थिक तंगी निगल लिया। पढ़ने का बहुत मन था लेकिन फीस न चुका पाने के कारण भाई-बहन की पढ़ाई छूट गई। 2012 गणित में आर्यभट्ट और वंडर किड के नाम से मशहूर हुए राशिद और हिफ्जा का राष्ट्रपति, राजनेता, क्रिकेटर और बॉलीवुड हस्तियों ने सम्मान किया था। गणित में कैलकुलेटर से तेज गणना करने वाले बच्चों से किए वायदे अधूरे रह गए। पिता कज्जाफी बेग की मृत्यु के बाद इन होनहारों के सामने परेशानियों का ऐसा पहाड़ खड़ा हुआ कि वह पढ़ाई से दूर हो गए।
राशिद अब 19 साल और हिफ्जा 17 साल की हो गई हैं। दस साल की उम्र में राशिद और सात साल की उम्र में हिफ्जा की प्रतिभा सबके सामने आई थी। कैलकुलेटर से तेज गणना के अलावा विश्व के किसी भी देश की राजधानी का नाम बताने के लिए दोनों को चंद सेकेंड लगते थे। मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद दोनों बच्चों को राजनीति, खेल और बॉलीवुड की हस्तियों ने सम्मानित किया। आर्थिक तंगी में पढ़ाई छूटने के बाद राशिद अपनी एक एकड़ जमीन पर खेती का काम कर रहे हैं जबकि हिफ्जा हाईस्कूल करने के बाद आगे पढ़ना नहीं चाहती।
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पिता की मृत्यु से लगा झटका :
राशिद और हिफ्जा के पिता कज्जाफी बेग ने दोनों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने का काम किया। पांच साल पहले चिकिनगुनिया की चपेट में आने के बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद से दोनों बच्चों की शिक्षा मुश्किल होती गई। एक निजी स्कूल और दिल्ली की एक एनजीओ ने राशिद और हिफ्जा की निशुल्क शिक्षा का बीड़ा उठाया था, लेकिन बीच में ही एनजीओ ने मदद बंद कर दी और स्कूल ने भी बिना फीस के पढ़ाने से मना कर दिया। उनके मामा वाहिद खान ने परिवार का साथ देने का काम किया। हिफ्जा ने हाईस्कूल की। बाद में उसका मन पढ़ाई में नहीं लगा। राशिद ने आजाद इंटर कॉलेज से इंटर का एग्जाम दिया है। छह महीने से फीस न भर पाने के चलते रिजल्ट रुका हुआ है।
राष्ट्रपति, सचिन तेंदुलकर और एश्वर्या राय ने किया था सम्मानित :
2012 में राशिद को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके दो साल बाद हिफ्जा भी राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुई। अखिलेश यादव ने तब मुख्यमंत्री रहते हुए बच्चों को आर्थिक मदद दी। उनके लालन-पालन और शिक्षा के लिए पांच बीघा जमीन भी देने की घोषणा की गई, लेकिन सत्ता बदलने के बाद जमीन का वायदा अधूरा रह गया। 2013 में दोनों बच्चों का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और बॉलीवुड अभिनेत्री एश्वर्या राय ने भी दोनों को सम्मानित किया।
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पढ़ने से अधिक जरूरी जिम्मेदारी :
राशिद का कहना है कि फिलहाल वह खेती का काम देख रहे हैं। मामा वाहिद और पिता के दोस्त कमल अग्रवाल ने उनके परिवार का मुश्किल समय में साथ दिया। अब मां और बहन की जिम्मेदारी पढ़ने से अधिक जरूरी है।
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बच्चों की प्रतिभा पर नाज :
कज्जाफी बेग के मित्र कमल अग्रवाल ने कहा कि गांव को दोनों बच्चों की प्रतिभा पर नाज है। अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन मिलता तो दोनों बच्चे देश में और भी नाम रोशन करते।
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