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११ लाख खर्च किए, अब तक शिक्षा नहीं दे पाए

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11 करोड़ में बने तीन कॉलेज, पढ़ाई की जगह लटका ताला
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गाजियाबाद। जिले में 11 करोड़ रुपये खर्च कर तीन कॉलेज बनाए गए हैं। बिल्डिंग पर पैसा खर्च हो चुका है। निर्माण एजेंसी शिक्षा विभाग को बिल्डिंग हैंडओवर कर चुकी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतना पैसा खर्च होने के बाद भी कॉलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं हुई। आसपास के लोग कॉलेजों में पढ़ाई कब शुरू होगी इस पर टकटकी लगाए हैं। पर बिल्डिंग पर ताला लटका है। शासन ने बिल्डिंग के लिए बजट तो दे दिया लेकिन शिक्षक और स्टाफ के पद सृजित नहीं किए। ऐसे में पढ़ाई कैसे शुरू हो। पद सृजन के लिए पत्राचार चल रहा है।
भवन मिला, शिक्षक-स्टाफ नहीं
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एजूकेशनल हब योजना के तहत भोजपुर ब्लॉक के मछेरी गांव में 4 करोड़ और 51 लाख रुपये की लागत से राजकीय इंटर कॉलेज बना था। 2014 में निर्माण शुरू हुआ और 2019 में कॉलेज का भवन बनकर तैयार हो गया। भवन शिक्षा विभाग को हैंडओवर भी किया जा चुका है। लेकिन अभी तक कॉलेज शुरू नहीं हुआ है। न यहां पर शिक्षकों की तैनाती हुई और न ही स्टाफ की। इलाके के लोगों नजदीक में शिक्षा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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तीन साल से बिल्डिंग पर ताला
मुस्तफाबाद बस्ती में भी एजुकेशनल हब योजना के तहत मॉडल इंटर कॉलेज बालकों के लिए बनाया गया था। इसकी लागत तीन करोड़ दो लाख रुपये थी। प्रस्ताव पास होने के बाद 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) ने 2019 में बिल्डिंग तैयार शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दी। तीन साल से बिल्डिंग पर ताला लटका हुआ है। यहां भी शिक्षक और स्टाफ की तैनाती नहीं हुई।
बालिकाओं को कॉलेज का इंतजार
एक तरफ बालिकाओं और महिला को सशक्त बनाने के लिए मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षा के लिए दूरदराज जाना पड़ रहा है। लोनी के प्रेम नगर में तीन करोड़ दो लाख रुपये की लागत से मॉडल इंटर कॉलेज बालिकाओं के लिए बनाया है। इसका प्रस्ताव 2015 में पास हुआ था और निर्माण 2019 में निर्माण पूरा होकर बिल्डिंग शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दी गई। यहां भी ताला लटका है।
पद सृजित नहीं
पद सृजित ना होने की वजह से इन कॉलेज का संचालन नहीं हो पाया है। इस तरह के चार भवन हैं इसमें राजकीय हाई स्कूल हुसैनपुर डीलना भी शामिल है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इन दोनों कॉलेज में प्रिंसिपल सहित शिक्षक और अन्य स्टाफ को मिलाकर 25-25 स्टाफ की नियुक्ति होनी है।
पीकेद्विवेदी, डीआईओएस
शासन को लिखा पत्र
विभाग की तरफ से इन भवनों को शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। इसको संचालित करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति और पद सृृजन को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। जिला योजना की बैठक में भी इसके संचालन की चर्चा हुई थी, जिसमें जल्द पद सृजित होने की बात कही गई है।
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अमृता सिंह, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी
डासना में इंटर कॉलेज लटका
रजापुर ब्लॉक स्थित राजकीय महिला डिग्री कॉलेज डासना का भी यही हाल है। इस क्षेत्र में 20 किमी के दायरे में कोई भी डिग्री कॉलेज नहीं है। डासना में करीब सात साल पहले चार करोड़ 77 लाख की लागत से डिग्री कॉलेज का निर्माण हुआ था, लेकिन निर्माण लागत बढ़ने के कारण 80 फीसदी कार्य होने के बाद बजट के अभाव में धूल फांक रहा है। 2018 से इसका कार्य बंद पड़ा हुआ है। निर्माणकारी कंपनी ने संशोधित बजट में चार करोड़ 44 लाख की मांग की है।
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