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54 घंटे चला जेनरेटर, गुलमोहर टावर वालों को लगा पांच लाख का फटका

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54 घंटे चला जेनरेटर, गुलमोहर टावर वालों को लगा पांच लाख का फटका
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गाजियाबाद। चिरंजीव विहार स्थित गुलमोहर टावर सोसायटी में 54 घंटे गुल रही बिजली से रेजिडेंट्स को पांच लाख से ज्यादा का फटका लग गया। सोसायटी का ट्रांसफार्मर खराब होने और लगातार डीजी सेटर से सप्लाई होने से हर फ्लैट में पावर बैकअप पर 108 यूनिट बिजली खर्च हुई। 25 रुपये प्रति यूनिट पावर बैकअप चार्ज होने के चलते हर फ्लैट पर 2700 रुपये और 190 फ्लैट वाली सोसायटी के लोगों पर करीब 5.17 लाख का भार पड़ा है। दो दिन से ज्यादा परेशानी झेलने वाले रजिडेंट्स की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। बिल्डर ने किराए पर 1000 केवीए के ट्रांसफार्मर से जैसे तैसे बिजली सप्लाई शुरू कराई है।
11 साल से सोसायटी बिल्डिंग का नहीं हुआ मेंटेनेंस
सोसायटी में बिजली ही नहीं, रेजिडेंट्स तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं। 10 साल पहले आरडब्ल्यूए का गठन होने के बावजूद मेंटेनेंस अब तक बिल्डर के हाथों में है। ऐसे में बीते 11 सालों से सोसायटी में मेंटेनेंस न होने से बिल्डिंग में खतरनाक सीलन, प्लास्टर गिरने और दरारें आ चुकी हैं। बिल्डर से लेकर जीडीए तक से लिखित में गुहार लगाने के बावजूद समाधान न होने से बिल्डिंग की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
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190 फ्लैट, क्षमता के अनुसार न स्वीकृत लोड व डीजी सेट
गुलमोहर सोसायटी के 190 फ्लैट में लोग रहते हैं। हर फ्लैट को 6 किलोवाट का लोड दिया गया है। साथ ही प्रति किलोवाट के हिसाब से रेजिडेंट्स से हर माह 600 रुपये फिक्स चार्ज वसूला जाता है। इसके बावजूद बिल्डर ने पावर कारपोरेशन से केवल 500 केवीए का स्वीकृत लोड लिया है। दूसरी ओर सोसायटी में प्रति फ्लैट डेढ़ किलोवाट का पावर बैकअप कनेक्शन दिया गया है। जबकि सोसायटी के एकमात्र डीजल जेनरेटर की क्षमता केवल 180 केवी की है। जबकि बैकअप के लिए सोसायटी में दूसरा डीजी सेट नहीं है। 10 साल पहले बिल्डर ने सोसायटी के दूसरे डीजी सेट को कहीं और भिजवा दिया, लेकिन अब तक वह वापस नहीं आया है।
मुख्य लाइन से नहीं जुड़ी सीवर लाइन, अग्निशमन उपकरण भी नहीं
करीब डेढ़ दशक पुरानी सोसायटी होने के बावजूद अब तक सोसायटी की सीवर लाइन मुख्य सीवर लाइन से नहीं जुड़ी है। जबकि रेजिडेंट्स से लाखों रुपये विकास शुल्क वसूला जा चुका है। आग से बचाव के लिए सोसायटी में पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। अब तक सोसायटी को फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं है। नियमानुसार अग्निशमन संबंधी उपकरण लगाने की कई बार मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सिक्योरिटी, पार्किंग की समस्या, खर्चे का नहीं दिया विवरण
सोसायटी में मानकों के तहत न तो सिक्योरिटी की व्यवस्था है और न ही कर्मचारियों व मालियों की। जीडीए अधिकारियों की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिल्डर को लिए जा रहे मेंटेनेंस शुल्क और खर्चों का विवरण देने को कहा गया था। लेकिन बिल्डर ने प्रशासनिक आदेशों के बावजूद खर्चे का ब्योरा नहीं दिया है।
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कोट्स...
1. सोसायटी में 11 सालों से मेंटेनेंस न होने से बिल्डिंग में सीलन, दरारें आने के साथ अब प्लास्टर गिरने लगा है। बिजली समस्या का स्थायी की जगह किराए का ट्रांसफार्मर लगाकर अस्थायी समाधान किया गया है। -- एके मिश्रा, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए
2. सोसायटी के कुल लोड से आधी क्षमता का कनेक्शन पावर कारपोरेशन से लिया है। सोसायटी में खराब मेंटेनेंस की समस्या से लोग परेशान हैं। -- राकेश चंद्र अग्रवाल, निवासी
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3. बिल्डर की कमी से सोसायटी के लोगों को 54 घंटे कटौती झेलनी पड़ी। ऐसे में रेजिडेंट्स को पावर बैकअप का बेफिजूल का खर्च वहन करना पड़ा है। -- सुशील कुमार अग्रवाल, निवास
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